नीमच। जब नीयत साफ और इरादे फौलादी हों, तो बड़े से बड़े रसूखदारों का साम्राज्य भी ताश के पत्तों की तरह ढह जाता है। नीमच जिले में इसकी जीती-जागती मिसाल पेश की है युवा आईएएस अधिकारी और वर्तमान कलेक्टर श्री हिमांशु चंद्रा (IAS) ने।
 जिले की कमान संभालते ही उन्होंने भू-माफियाओं, अवैध कब्जाधारियों और राजनीतिक संरक्षण प्राप्त रसूखदारों के खिलाफ जो ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ शुरू की है, उसने पूरे मध्य प्रदेश के प्रशासनिक हलकों में तहलका मचा दिया है। बिना किसी सियासी दबाव के जिले भर में अरबों रुपये की शासकीय संपत्तियों को मुक्त कराकर उन्होंने साबित कर दिया है कि एक सच्चा लोकसेवक सिर्फ जनता के प्रति जवाबदेह होता है।
अंकगणित भी हुआ फेल 18 कलेक्टर्स के कुल योग से भी भारी अकेला कार्यकाल-
वर्ष 1998 में जब से नीमच स्वतंत्र जिला बना, तब से लेकर अब तक यहां करीब 18 कलेक्टर्स आए और गए। लेकिन जो काम पिछले 28 वर्षों में सामूहिक रूप से नहीं हो सका, उसे अकेले कलेक्टर हिमांशु चंद्रा के नेतृत्व वाली टीम ने कर दिखाया है। उनके द्वारा मुक्त कराई गई जमीनों का रकबा और बाजार मूल्य, नीमच के इतिहास में अब तक की सभी कार्रवाइयों के कुल योग से भी कहीं अधिक है। शहर से लेकर राजस्व अंचलों तक की दर्जनों एकड़ बेशकीमती जमीनें अब दोबारा मध्य प्रदेश शासन के अधिकार में आ चुकी हैं।
तकनीकी दिमाग और बेखौफ एक्शन का कॉम्बो- आईआईटी (IIT) से पढ़े कलेक्टर हिमांशु चंद्रा ने जमीन घोटालों और अवैध कब्जों के पुराने रिकॉर्ड्स का डिजिटल और तकनीकी विश्लेषण करवाया। इसके बाद जब ऑपरेशन शुरू हुआ, तो रसूखदारों को संभलने का मौका तक नहीं मिला।
 हाल ही में शहर के हृदयस्थल पर स्थित जीवाजी राव छात्रावास की 4.32 लाख वर्ग फीट (करीब 4 लाख फीट) प्राइम लैंड से अवैध कब्जा हटाने की कार्रवाई इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। लगभग 500 करोड़ रुपये बाजार मूल्य वाली इस जमीन को पूरी तरह अतिक्रमण मुक्त कराकर जनहित के कार्यों के लिए नगरपालिका के सुपुर्द कर दिया गया है।
सिर्फ कार्रवाई नहीं, जनता के लिए अभिनव प्रयोग भी- कलेक्टर चंद्रा सिर्फ अवैध निर्माण तोड़ने के लिए ही नहीं, बल्कि आम जनता को राहत देने वाले अपने संवेदनशील और अनूठे प्रयोगों के लिए भी लोकप्रिय हो चुके हैं।
 निःशुल्क आवेदन पहल- जनसुनवाई में आने वाले गरीब फरियादियों से फॉर्म लिखने के नाम पर पैसे ऐंठने वाले दलालों को उन्होंने खदेड़ा और स्कूली बच्चों को कलेक्टरेट बुलाकर निःशुल्क आवेदन लिखने की जिम्मेदारी सौंपी, जिससे बच्चों को प्रशासनिक समझ मिली और गरीबों का पैसा बचा।
 प्रशासन पहुंचा गांव की चौपाल पर- ग्रामीणों की समस्याओं का मौके पर निपटारा करने के लिए उन्होंने ऐतिहासिक 'रात्रि चौपाल' की शुरुआत की, जहां पूरा प्रशासनिक अमला खुद गांव के बीच बैठकर देर रात तक जनसमस्याएं सुलझाता है।
 स्वास्थ्य और कल्याण में अव्वल उनके कुशल नेतृत्व के कारण नीमच को SIR-2026 और सैनिक कल्याण कोष में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए माननीय राज्यपाल द्वारा राज्य स्तर पर सम्मानित भी किया जा चुका है।
जनता के दिलों में बनाई जगह-अकेले नीमच नपा क्षेत्र में 18 से 20 हेक्टेयर की सबसे महंगी व्यावसायिक और आवासीय जमीनों को माफियाओं से मुक्त कराना कोई साधारण बात नहीं थी। यही कारण है कि आज नीमच की जनता उन्हें एक 'नायक' की तरह देख रही है। सोशल मीडिया से लेकर धरातल तक उनकी कर्तव्यपरायणता और बेदाग छवि की भूरी-भूरी प्रशंसा हो रही है।  इस भूमि पर अब जनता के लिए पार्क, कम्युनिटी हॉल और सरकारी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं, जो नीमच के भविष्य को बदल कर रख देंगी।