नीमच। जिले में आधुनिक डेयरी व्यवसाय अब ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने के साथ किसानों और युवाओं के लिए रोजगार का मजबूत जरिया बन रहा है। कलेक्टर हिमांशु चंद्रा के मार्गदर्शन में पशुपालन विभाग द्वारा डेयरी क्षेत्र को बढ़ावा देने के प्रयासों को गति मिली है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रदेश में दूध उत्पादन बढ़ाकर 20 प्रतिशत तक ले जाने के संकल्प में नीमच भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। जिले में प्रतिदिन करीब 9 लाख 87 हजार लीटर दूध का उत्पादन हो रहा है,जबकि डेयरी क्षेत्र की वार्षिक विकास दर करीब 6.4 प्रतिशत बताई गई है।
नौकरी छोड़ गांव में शुरू किया डेयरी व्यवसाय- ग्राम उपरेड़ा के कुलदीप ने डिग्री हासिल करने के बाद शहर में नौकरी करने के बजाय गांव में ही डेयरी व्यवसाय शुरू करने का फैसला किया। आर्थिक संसाधनों की कमी चुनौती बनी,लेकिन डॉ. भीमराव आंबेडकर कामधेनु योजना से मिले सहयोग ने उनके प्रयासों को मजबूती दी। उन्होंने 25 उन्नत नस्ल के दुधारू पशुओं की डेयरी इकाई स्थापित करने की दिशा में कदम बढ़ाया। वर्तमान में सात पशुओं से करीब 70 लीटर प्रतिदिन दूध का उत्पादन हो रहा है। उनका लक्ष्य इसे बढ़ाकर करीब 250 लीटर प्रतिदिन करने का है।
पत्नी के सहयोग से 120 लीटर तक पहुंचा उत्पादन-नीमच के किशोर पाटीदार ने भी शासकीय योजना का लाभ लेकर डेयरी फार्म शुरू किया। पशुओं की देखभाल से लेकर खान-पान और फार्म संचालन में पत्नी ललिता पाटीदार भी सहयोग कर रही हैं। कुछ पशुओं से शुरू हुआ कारोबार अब करीब 120 लीटर प्रतिदिन दूध उत्पादन तक पहुंच चुका है। परिवार ने इसे आगे बढ़ाकर 400 से 500 लीटर प्रतिदिन उत्पादन का लक्ष्य तय किया है।
दो पशुओं से शुरुआत, अब विस्तार की तैयारी- ग्राम जनकपुर के अक्षय के लिए मुख्यमंत्री डेयरी प्लस योजना आय बढ़ाने का माध्यम बनी। उन्नत नस्ल के दुधारू पशुओं से दूध उत्पादन बढ़ा और अब वे डेयरी का विस्तार करने की तैयारी में हैं। दो पशुओं से शुरू हुआ सफर अब चार, छह और आगे लगातार पशुधन बढ़ाने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रहा है। परिवार भी इसमें सहयोग कर रहा है।
दूध के साथ जैविक खेती से भी अतिरिक्त कमाई- डेयरी व्यवसाय का फायदा केवल दूध बेचने तक सीमित नहीं है। पशुपालक गोबर से वर्मी कम्पोस्ट,जीवामृत और गोमूत्र से जैविक कीटनाशक तैयार कर रहे हैं। इससे खेती में रासायनिक लागत कम करने के साथ अतिरिक्त आय के रास्ते भी खुल रहे हैं।
42 लाख तक की डेयरी इकाई पर योजना का सहारा-डॉ. भीमराव आंबेडकर कामधेनु योजना के तहत स्वीकृत प्रकरणों में उच्च नस्ल के पशु उपलब्ध कराकर डेयरी इकाइयां शुरू कराई जा रही हैं। 25 दुधारू संकर गाय अथवा भैंस की इकाई के लिए 42 लाख रुपए, जबकि देशी गायों की इकाई के लिए 36 लाख रुपए की लागत निर्धारित है।
वहीं मुख्यमंत्री डेयरी प्लस योजना के तहत 2.95 लाख रुपए की इकाई पर सामान्य वर्ग के हितग्राहियों को 50 प्रतिशत तथा अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग के हितग्राहियों को 75 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है। जिले में अब तक 55 हितग्राहियों को 110 दुधारू पशु उपलब्ध कराए जा चुके हैं।
प्रशिक्षण और तकनीकी मार्गदर्शन भी
पशुपालन विभाग द्वारा डेयरी इकाइयों को तकनीकी मार्गदर्शन और प्रशिक्षण दिया जा रहा है। विभाग का उद्देश्य सफल डेयरी इकाइयों को रोल मॉडल के रूप में विकसित करना है, ताकि आसपास के किसान और युवा उनसे प्रेरणा लेकर डेयरी व्यवसाय की ओर बढ़ सकें। गांव में रोजगार, पशुधन से आय और आत्मनिर्भरता—नीमच में सरकारी योजनाओं के जरिए डेयरी व्यवसाय अब ग्रामीण परिवारों की आर्थिक मजबूती का नया आधार बनता दिखाई दे रहा है।