नीमच। स्वामित्व रजिस्ट्री अभियान को लेकर मध्य प्रदेश में सरकार और पटवारियों के बीच का टकराव अब सीधे टकराव और आर-पार की लड़ाई में तब्दील हो चुका है। नीमच जिले में तीन पटवारियों की सेवा बर्खास्तगी के विरोध में गुरुवार को कलेक्ट्रेट परिसर छावनी में बदल गया। बड़ी संख्या में पटवारी कलेक्ट्रेट पहुंचे, लेकिन उनके विरोध का अंदाज इस बार बिल्कुल जुदा और तीखा था। पटवारी अपने हाथों में फूल-मालाएं लेकर पहुंचे थे। उन्होंने नौकरी से निकाले गए अपने साथियों को माला पहनाकर सम्मानित किया और जिला प्रशासन की दंडात्मक कार्रवाई पर जमकर तंज कसा।
मुख्य बिंदु: जो इस विवाद की बड़ी वजह हैं
दबाव की राजनीति स्वामित्व रजिस्ट्री के सॉफ्टवेयर और नियमों में कई तकनीकी व व्यावहारिक खामियां हैं। इन्हें सुधारे बिना ही पटवारियों पर ऑनलाइन एंट्री का दबाव बनाया जा रहा है।
भेदभाव का आरोप.
जब पूरे जिले और प्रदेश के पटवारी इस समस्या का विरोध कर रहे हैं, तो केवल तीन पटवारियों पर ही बर्खास्तगी की गाज क्यों गिराई गई?
अल्टीमेटम
जब तक तीनों बर्खास्त पटवारियों की बिना शर्त बहाली नहीं होती और नियमों में संशोधन नहीं होता, तब तक हड़ताल जारी रहेगी।
सॉफ्टवेयर की खामियां दूर नहीं की और सीधे दे दी नौकरी से निकालने की सजा-मध्य प्रदेश पटवारी संघ के जिलाध्यक्ष दिलीप सिंह चुण्डावत ने प्रशासन को आड़े हाथों लेते हुए कहा, "स्वामित्व रजिस्ट्री के काम में जमीनी स्तर पर कई गंभीर तकनीकी दिक्कतें आ रही हैं। इन व्यावहारिक समस्याओं के निराकरण के लिए संघ द्वारा पहले भी प्रशासन को लिखित में अवगत कराया गया था। इसके बावजूद, सिस्टम की कमियां दूर करने के बजाय पटवारियों को बलि का बकरा बनाया जा रहा है। बिना किसी ठोस विभागीय जांच या आधार के तीन साथियों को बर्खास्त करना तानाशाही है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।"
कलेक्टर से नहीं मिल पाए तो मुख्य द्वार पर ही डाल दिया डेरा, 10 मिनट का मौन रखा,प्रदर्शन के दौरान कलेक्ट्रेट परिसर "जिला प्रशासन होश में आओ" और "दमनकारी नीतियां बंद करो" के नारों से गूंज उठा आक्रोशित पटवारी सीधे कलेक्टर से मिलकर अपनी बात रखना चाहते थे। जब कलेक्टर से मुलाकात नहीं हो पाई, तो नाराज पटवारी कलेक्टर कार्यालय के मुख्य प्रवेश द्वार (चैनल गेट) पर ही धरने पर बैठ गए। प्रशासन की इस बेरुखी और सुनवाई न होने के विरोध में सभी प्रदर्शनकारियों ने कलेक्ट्रेट के दरवाजे पर करीब 10 मिनट का मौन रखकर अपना विरोध दर्ज कराया। इस हंगामे के चलते कलेक्ट्रेट परिसर में काफी देर तक गहमागहमी और तनाव का माहौल बना रहा।
प्रशासन पर करारा कटाक्ष- 'नौकरी ही छीननी है तो माला पहनाकर सम्मानपूर्वक घर भेज दो'-कलेक्ट्रेट के मुख्य द्वार पर जब पटवारियों ने अपने बर्खास्त साथियों का सार्वजनिक रूप से माला पहनाकर स्वागत किया, तो वहां मौजूद हर शख्स हैरान रह गया। जिलाध्यक्ष चुण्डावत ने प्रशासनिक कार्रवाई पर तीखा कटाक्ष करते हुए कहा, "अगर जायज और तकनीकी दिक्कतों को उजागर करने की सजा नौकरी से निकालना ही है, तो प्रशासन हम सभी को एक साथ माला पहना दे और सम्मानपूर्वक घर विदा कर दे। नौकरी जाने के बाद भी हमारे साथी इस हक की लड़ाई में संघ के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं।"
जनता परेशान: जमीन की रजिस्ट्री, नामांतरण और सीमांकन के काम पूरी तरह ठप-पटवारी संघ ने साफ कर दिया है कि जिले में 'कलमबंद हड़ताल' का शंखनाद हो चुका है। पटवारियों ने सभी शासकीय वॉट्सऐप ग्रुप छोड़ दिए हैं और टैबलेट बंद कर दिए हैं। इस हड़ताल के कारण नीमच जिले में जमीन की रजिस्ट्री, नामांतरण सीमांकन जाति-मूल निवासी प्रमाण पत्र का सत्यापन और पीएम किसान योजना से जुड़े सभी महत्वपूर्ण राजस्व कार्य पूरी तरह ठप हो गए हैं, जिससे आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
यदि आप इस समाचार में नीमच कलेक्टर या किसी प्रशासनिक अधिकारी का पक्ष शामिल करना चाहते हैं, तो मुझे उनका नाम या बयान बताएं, मैं उसे भी इसमें बिल्कुल सटीक स्थान पर जोड़ दूंगा।