नीमच। विद्युत वितरण कंपनी के कर्मचारी प्रतापसिंह शक्तावत (35) की करंट लगने से हुई मौत के बाद मामला लगातार तूल पकड़ रहा है। घटना के बाद मृतक के परिजनों और अन्य लोगों ने मुआवजे, परिवार के एक सदस्य को नौकरी तथा हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर विद्युत कार्यालय के सामने शव रखकर प्रदर्शन किया था। इस दौरान हुए घटनाक्रम को लेकर कैंट थाना पुलिस ने करणी सेना प्रमुख जीवनसिंह शेरपुर सहित छह लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। वहीं, कर्मचारी की मौत और विभागीय जवाबदेही के मुद्दे पर करणी सेना के पदाधिकारी अधीक्षण यंत्री के खिलाफ ज्ञापन देने कलेक्टोरेट पहुंचे।
कर्मचारी की मौत के बाद प्रदर्शन
जानकारी के अनुसार, प्रतापसिंह पिता भंवरसिंह शक्तावत, निवासी अमावली महल, विद्युत पोल पर काम करते समय करंट की चपेट में आ गए थे। हादसे में उनकी मौत हो गई। घटना के बाद परिजनों और प्रदर्शनकारियों ने आर्थिक सहायता, परिवार के एक सदस्य को नौकरी और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई। मामले में यह स्पष्ट होना महत्वपूर्ण है कि कर्मचारी को काम पर लगाने से लेकर विद्युत आपूर्ति बंद रखने और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने तक निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन किया गया था या नहीं।
इंजीनियर की शिकायत पर छह लोगों के खिलाफ मामला
पुलिस के अनुसार, विद्युत विभाग के इंजीनियर रविकांत रंजन ने कैंट थाने में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि प्रदर्शन के दौरान स्थिति संभालने पहुंचे इंजीनियर के साथ गाली-गलौज और अभद्र व्यवहार किया गया। इसके अलावा थप्पड़ मारने तथा विद्युत कार्यालय में आगजनी की धमकी देने के आरोप भी लगाए गए हैं।
पुलिस ने शिकायत के आधार पर जीवनसिंह शेरपुर सहित छह लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 223(बी), 224, 196(बी), 351(2), 196(2) एवं 3(5) के तहत प्रकरण दर्ज किया है। फिलहाल शिकायत में लगाए गए आरोपों के आधार पर पुलिस कार्रवाई हुई है। आरोपों की पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।
विभागीय जवाबदेही को लेकर उठ रहे सवाल
दूसरी ओर, करणी सेना और प्रदर्शनकारियों की ओर से कर्मचारी की मौत के मामले में विद्युत विभाग की जवाबदेही तय करने की मांग की जा रही है। उनका आरोप है कि हादसे में सुरक्षा संबंधी प्रक्रियाओं और परमिट व्यवस्था की जांच कर जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
प्रदर्शनकारियों ने यह सवाल भी उठाया है कि कर्मचारी की मौत के मामले में विभागीय अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने को लेकर क्या कदम उठाए गए हैं। रात करीब दो बजे प्रदर्शन के दौरान एक अधिकारी द्वारा कथित तौर पर की गई टिप्पणी को भी प्रदर्शनकारियों ने असंवेदनशील बताया है। हालांकि, इस टिप्पणी और परमिट संबंधी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। इन बिंदुओं पर विद्युत विभाग का आधिकारिक पक्ष सामने आना भी महत्वपूर्ण होगा।
अधीक्षण यंत्री के खिलाफ ज्ञापन
करणी सेना के जिला प्रमुख विक्की बना बांगरेड़ की ओर से अधीक्षण यंत्री के खिलाफ ज्ञापन देने की जानकारी दी गई थी। इसी क्रम में करणी सेना के पदाधिकारी कलेक्टोरेट पहुंचे। संगठन की ओर से कर्मचारी की मौत के मामले में निष्पक्ष जांच, विभागीय जिम्मेदारी तय करने और उचित कार्रवाई की मांग प्रशासन के समक्ष रखे जाने की बात कही गई है।
जांच से स्पष्ट होगी जिम्मेदारी
इस पूरे मामले में दो पहलू सामने हैं। पहला, विद्युत पोल पर काम के दौरान कर्मचारी की सुरक्षा के लिए निर्धारित नियमों का पालन हुआ था या नहीं और हादसा किन परिस्थितियों में हुआ। दूसरा, हादसे के बाद हुए प्रदर्शन के दौरान कथित अभद्रता और धमकी के आरोपों में कितनी सच्चाई है। दोनों मामलों की निष्पक्ष जांच जरूरी है।
प्रशासन और विद्युत विभाग की ओर से हादसे की परिस्थितियों, परमिट व्यवस्था तथा सुरक्षा प्रोटोकॉल पर स्थिति स्पष्ट किए जाने से मामले में जवाबदेही तय करने में मदद मिलेगी। वहीं, प्रदर्शन के दौरान दर्ज प्रकरण में भी निष्पक्ष जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई होनी है। अब निगाहें प्रशासन की जांच और दोनों पक्षों के आधिकारिक पक्ष पर टिकी हैं।