मल्हारगढ़। अफीम नीति घोषित नहीं होने से मालवा क्षेत्र के अफीम उत्पादक किसानों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। पिछले वर्ष 11 सितंबर को अफीम नीति घोषित हुई थी, लेकिन इस बार नीति घोषित होने में देरी से अफीम की खेती पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका है। इसका नुकसान सीधे अन्नदाता किसानों को उठाना पड़ सकता है।
मल्हारगढ़ विधानसभा क्षेत्र से प्रत्याशी रहे किसान नेता श्यामलाल जोकचंद ने केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री को पत्र लिखकर केंद्र सरकार से तत्काल अफीम नीति घोषित करने और किसानों के हित में आवश्यक संशोधन करने की मांग की है।
जोकचंद ने पत्र में मांग की कि सीपीएस पद्धति के पट्टे बंद कर सभी पात्र किसानों को पारंपरिक तरीके से चिरा लगाकर अफीम उत्पादन करने वाले पट्टे जारी किए जाएं। प्रत्येक किसान को 10 आरी के पट्टे दिए जाएं तथा जिन किसानों के पास अभी तक अफीम का लाइसेंस नहीं है, उन्हें भी नए पट्टे जारी किए जाएं।
डोडाचूरा नीति में बदलाव कर एक लाख रुपये प्रति क्विंटल खरीद करे सरकार
किसान नेता ने केंद्र सरकार से डोडाचूरा नीति में तत्काल बदलाव करने और डोडाचूरा एक लाख रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीदने की मांग की। उन्होंने डोडाचूरा में मॉर्फिन की मात्रा 0.2 प्रतिशत से भी कम होने का उल्लेख करते हुए इसे एनडीपीएस एक्ट के दायरे से बाहर करने की मांग उठाई, ताकि किसानों को कानूनी मामलों में राहत मिल सके।
उन्होंने कहा कि मंदसौर संसदीय क्षेत्र सहित मालवा-मेवाड़ में डोडाचूरा से जुड़े अनेक प्रकरणों के कारण किसान परेशान हैं। केंद्र सरकार इस मामले में उचित निर्णय लेकर किसानों को राहत दे। इससे किसानों को कानूनी परेशानियों से राहत मिलने के साथ न्यायालयों पर मुकदमों का बोझ कम करने में भी मदद मिल सकती है।
अफीम के भाव एक लाख रुपये प्रति किलो और फसल बीमा लागू करने की मांग- श्यामलाल जोकचंद ने केंद्र सरकार से अफीम का भाव बढ़ाकर एक लाख रुपये प्रति किलो करने, अफीम की फसल का बीमा लागू करने तथा किसानों को प्राकृतिक आपदा और फसल खराब होने की स्थिति में आर्थिक सुरक्षा देने की मांग भी की।
उन्होंने कहा कि अफीम की खेती में किसानों को काफी मेहनत, समय और पूंजी लगानी पड़ती है। इसलिए केंद्र सरकार को ऐसी अफीम नीति बनानी चाहिए, जिससे किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिले और खेती में होने वाले नुकसान से सुरक्षा भी मिल सके।
केंद्र सरकार किसानों की मांगों पर तत्काल ले निर्णय-जोकचंद ने केंद्र सरकार से मांग की कि अफीम नीति तत्काल घोषित कर किसानों की असमंजस की स्थिति समाप्त की जाए। साथ ही, पट्टा वितरण व्यवस्था में सुधार कर प्रत्येक पात्र किसान को अफीम की खेती का अवसर दिया जाए। उन्होंने कहा कि अन्नदाता किसानों के हितों की रक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी है। केंद्र सरकार को किसानों की मांगों पर गंभीरता से विचार कर जल्द निर्णय लेना चाहिए।