यही स्थिति जिला सहकारी बैंक की भी है। नीमच-मंदसौर जिले में किसानों को खाद,बीज देने के साथ ही आर्थिक रूप से मदद करने के लिए 172 सहकारी समितियों के माध्यम से काम किया जा रहा है। जिसमें नीमच जिले में 68 और मंदसौर मैं 104 सहकारी समितियां शामिल हैं नियमानुसार इन समितियों के हर 5 साल में चुनाव कराए जाते हैं, लेकिन जिले में पिछले 11सालों से समितियों के चुनाव नहीं कराए गए हैं ।आलम यह है कि जिला सहकारी बैंक मंदसौर के अंतर्गत आने वाली नीमच-मंदसौर जिले की सभी 172 समितियां प्रशासकों के भरोसे चल रही हैं सहकारिता विभाग द्वारा अपने सहकारी निरीक्षकों को इनका प्रशासक नियुक्त किया गया है। हालात यह है कि पर्याप्त अधिकारी न होने से एक-एक प्रशासक के पास 8 से 10 समितियों का प्रभार है। ऐसे में समितियों के भी तमाम काम प्रभावित हो रहे हैं। लगातार इन्हें लेकर शिकायतें सामने आ रही हैं।
6 माह से अधिक नहीं रह सकते प्रशासक
सहकारिता विभाग की माने तो समिति पर प्रशासक की नियुक्ति विशेष परिस्थितियों में की जाती है कभी समय से चुनाव न होने या अन्य किसी प्रकार की प्रतिकूल परिस्थतियां होने पर प्रशासक की नियुक्ति की जाती है। यह नियुक्ति भी 6 माह के लिए की जाती है।बहुत विपरीत परिस्थितियां होने पर इसे एक या दो बार बढ़ाया जा सकता है।
2019 में हटा दिए थे प्रशासक
जब कांग्रेस की सरकार बनी थी, उसके बाद जिला सहकारी बैंकों की समीक्षा की गई थी और समितियों के प्रशासक पद से निरीक्षकों को हटा दिया था,उस समय निर्देश दिए गए थे कि समितियों में मी योग्य सदस्य या पदाधिकारी हो, जिसे समिति का प्रभार दिया जा सकता है,उससे काम कराया जाए।साथ ही कांग्रेस की कमलनाथ सरकार ने जिला सरकारी बैंकों में भी प्रशासक नियूक्त कर दिए थे और सहकारिता के चुनाव कराने की तैयारियां शुरू की कर दी
थी, लेकिन कांग्रेस की सरकार गिरते ही सरकार ने इस प्रक्रिया को फिर से रोक दिया था और वापस समितियों का प्रभार प्रशासकों को सौंप दिया था।
इस मामले में पूर्व विधायक व जिला सहकारी बैंक के पूर्व अध्यक्ष नंदकिशोर पटेल का कहना है कि सहकारिता के चुनाव नहीं होने के कारण किसानों को प्रतिनिधित्व नहीं मिल पा रहा है और समितियों में सीधे तौर पर भाजपा से जुड़े लोगों का हस्तक्षेप बना हुआ है इस कारण किसानों की समस्याओं का भी निराकरण नहीं हो पाता है।क्योंकि कहीं न कहीं किसानों को लाभ देने में भेदभाव होता है। बीते कई वर्षों से सरकार सहकारिता चुनाव टाल रही है।