नीमच। MTFE नाम की ऑनलाइन ट्रेडिंग कंपनी ने 5 महीने में रुपए डबल करने का दावा किया। एप के माध्यम से लोगों से 200 करोड़ रुपए से अधिक जमा कराए और गायब हो गई। दावा है कि इस जाल में करीब 20 हजार लोग फंसे हैं। जिले में पिछले एक साल से रुपए दोगुने करने के नाम पर फर्जीवाड़ा चल रहा था। करीब एक सप्ताह पहले एप ने काम करना बंद कर दिया। जमा कराए गए रुपए निकलने बंद हुए, तो लोग एजेंट यानी कंपनी के जूनियर सीईओ के पास पहुंचे, जहां से संतोषजनक जवाब नहीं मिला। पीड़ितों में पुलिसकर्मी, सरकारी अफसर, कर्मचारी, पत्रकार, नेता, किसान और व्यापारी भी शामिल हैं। किसी ने बेटे-बेटी की शादी के लिए, तो किसी ने पत्नी के गहने बेचकर निवेश किया था। कुछ लोग ऐसे भी हैं, जिन्होंने चोरी-छिपे रुपए जमा करा दिए। रुपए डूबने की आशंका के चलते अब सभी की चिंता बढ़ गई है। ठगी का शिकार हुए लोग खुलकर सामने भी नहीं आ रही हैं। अभी तक सिर्फ एक शिकायती आवेदन पुलिस के पास पहुंचा है। इस मामले में हिंदू जागरण मंच की ओर से सोमवार को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के नाम एसपी को ज्ञापन दिया। ज्ञापन में कहा है कि कंपनी के हुजेफा जमाली ने लालच देकर इन्वेस्टमेंट के नाम पर नीमच जिले से करीब 6 हजार आईडी बनाई गई हैं। इनके जरिए रुपए इन्वेस्ट करवा लिए। बताया गया कि कलेक्टर को भी इसकी सूचना दी गई थी। इसके बावजूद कार्रवाई नहीं की गई, इसलिए MTFE के कर्मचारियों को गिरफ्तार कर निवेशकों के रुपए लौटाए जाएं। ऐसा नहीं होने पर उग्र आंदोलन किया जाएगा
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करीब एक साल पहले एमटीएफई नाम की कंपनी ने नीमच में काम शुरू किया। पटवा कॉम्प्लेक्स में ऑफिस खोला। कंपनी ने एप के जरिए रुपए इन्वेस्ट करने की बात कही। एप गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध था, इसलिए लोगों को भरोसा भी हो गया। कंपनी से जुड़े लोगों ने बताया कि रुपए सोच-समझकर ट्रेडिंग में इन्वेस्ट किए जाते हैं, जिससे काफी मुनाफा होता है। लाभ का आधा हिस्सा इन्वेस्टर्स को दिया जाता है। शुरुआत में लोगों की आईडी बनाई गई। नई कंपनी थी, तो लोगों ने कम पैसे इन्वेस्ट किए। विश्वास जीतने के लिए कंपनी ने कुछ लोगों को रुपए डबल करके दिए। कमाई हुई तो लोग ज्यादा इन्वेस्ट करने लगे। कुछ ने तो लाखों रुपए लगा दिए। कमीशन के लालच में लोग परिवार, रिश्तेदार और परिचितों को भी रुपए लगाने के लिए मोटिवेट करने लगे। कुछ इन्वेस्टर्स को एप पर इतना भरोसा हो गया कि उन्होंने रिश्तेदारों को इन्वेस्टमेंट करने के एवज में चेक तक दे दिए थे। उनका दावा था कि पैसा डूब जाता है, तो वे उसकी भरपाई करेंगे। जब यह कंपनी आई थी, तब बताया गया था कि इस प्रोडक्ट पर सेल करो-बाय करो और मुनाफा कमाओ। बाद में कंपनी ने निवेशकों को पैसा लगाने के लिए कहा। बताया गया- वे अपने हिसाब से ऑटो मोड में इन्वेस्ट करेंगे। इससे महज तीन महीने में पैसा डबल हो जाएगा। अपने साथ नए सदस्य जोड़ने पर कमीशन भी मिलेगा। जोड़े गए सदस्य के मुनाफे में से भी कुछ डॉलर हर बार कमीशन के रूप में मिलेंगे।
1. हुजैफा जमाली,
जूनियर सीईओ
धोखाधड़ी में सबसे ज्यादा चर्चित नाम हुजैफा जमाली का बताया जा रहा है। उसने नीमच में एप की शुरुआत की थी। इसे कंपनी का जूनियर सीईओ भी कहा जा रहा है। उसने बड़े-बड़े सेमिनार कर निवेशकों को लालच दिया। हुजैफा बस स्टैंड के पास पटवा कॉम्प्लेक्स में ऑफिस संचालित करता था। मगर, अब उसके ऑफिस पर ताला लगा है। हुजैफा एल्यूमीनियम फेब्रिकेशन सामान का कारोबारी है। एप बंद होने की जानकारी मिलते ही उसके ऑफिस के बाहर बीते शुक्रवार को लोगों की भीड़ लग गई। हुजैफा ही लोगों को इस एप में रुपए इन्वेस्ट करने के लिए मोटिवेट करता था। कंपनी ने कितने लोगों को शिकार बनाया, इसका सही आंकड़ा सामने नहीं आया है। नाम नहीं छापने की शर्त पर एक इन्वेस्टर ने बताया कि एक बार वह हुजैफा के सेमिनार में शामिल हुआ था। इसमें हुजैफा ने खुद बताया था कि जिले में 20 हजार से अधिक लोग एप के जरिए इन्वेस्ट कर चुके हैं। इन्होंने 200 करोड़ से अधिक की पूंजी लगा रखी है। इसके अलावा, पड़ोसी जिलों और राजस्थान के लोगों ने भी इन्वेस्ट किया है। इस एप्लीकेशन का संचालन कहां से हो रहा है, किस तरह हो रहा है, कई महत्वपूर्ण जानकारियां न तो आम लोगों को थी, न अधिकारियों को पता है। बताया जा रहा है कि यह कंपनी भारत में रजिस्टर्ड ही नहीं है। कंपनी कनाडा से संचालित हो रही है। इसके निवेशक भारत के साथ दक्षिण एशियाई देशों में भी हैं।
पुलिस ने पूछताछ की तो हुजैफा घबरा गया, अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा/ मामला सामने आने के बाद पुलिस ने हुजैफा जमाली को पूछताछ के लिए बुलाया गया। उसने पुलिस को बताया कि वह नहीं जानता है कि कंपनी का मालिक कौन है? वह सेमिनार में प्रचार करने की बात से मुकर गया। हुजैफा ने पुलिस को बताया कि उसने सेमिनार नहीं लिए। बच्चे की बर्थडे पार्टी में गया था। वहां कुछ लोगों को एप के बारे में बताया। उन्हें भी समझ आया, तो इन्वेस्ट किया। पूछताछ के दौरान हुजैफा ने घबराहट की बात कही, तो उसे जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां से जांच के बाद निजी अस्पताल में भर्ती किया था। हालांकि, अब वह स्वस्थ है। घर पर है, लेकिन किसी से बात नहीं कर रहा हैं। एमटीएफई (MTFE) कंपनी में वेंडी नाम की एक महिला किरदार भी है। उसे भारत में कंपनी का सीईओ बताया गया। जब कभी किसी व्यक्ति को एप या निवेश को लेकर शंका होती या कंपनी फर्जी लगती, तो वेंडी ही उन्हें फोन पर कन्वेंस करती थी। इसका असली नाम पता किसी को नहीं मालूम। इसकी वॉट्सएप प्रोफाइल पर जो डिस्प्ले पिक्चर है वो संभवतः किसी चीनी या जापानी युवती की लग रही थी। बताया जा रहा है कि इस महिला से कोई भी कभी भी एप को लेकर बात कर सकता था। वो हिंदी और अंग्रेजी में बात करती थी। फिलहाल, महिला के बारे में कंपनी से जुड़े किसी भी निवेशक और एजेंट को सटीक जानकारी नहीं है।