नीमच, 20 जुलाई। ज्ञानोदय इंटरनेशनल स्कूल में गुरु पूर्णिमा' का उत्सव बहुत उत्साह और उमंग के साथ मनाया गया। समारोह की शुरुआत मे मां सरस्वती वन्दना, गुरू वन्दना और दीप प्रज्जवलन, माल्यार्पण के साथ हुई। इस अवसर पर व्यक्ति के जीवन में 'गुरु' के गुणों और महत्व को दर्शाते हुए बताया की गुरु अंधकार के आवरण को हटाता है और अपने शिष्यों को ज्ञान की शक्ति से प्रकाशित करता है। यह सीमाओं को भी पार करता है और विभिन्न पृष्ठभूमि के लोगों को शिक्षा और श्रद्धा की छत्रछाया में एकजुट करता है। इस अवसर पर शिक्षकों ने कहा कि गुरु एक मार्गदर्शक होता है जो जीवन की यात्रा में हमारा मार्गदर्शन करता है। गुरु हमें ज्ञान और बुद्धि प्रदान करते हैं, जिससे हमें सही निर्णय लेने में मदद मिलती है। शिक्षा में गुरु महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे हमें जटिल विषयों को समझने में मदद करते हैं, भविष्य की चुनौतियों के लिए हमारे दिमाग को तैयार करते हैं। उन्होंने आगे कहा कि महर्षि वेद व्यास को सबसे महान गुरु के रूप में सम्मानित किया जाता है। वेदों को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक मौखिक रूप से पारित किया गया था। महर्षि वेद व्यास ने उन्हें संकलित किया और भगवान गणेश ने लेखक के रूप में उनके शब्दों को लिखा। इस तरह वेदों को लिखित प्रारूप में संरचित किया गया। गुरु पूर्णिमा महर्षि वेद व्यास और भगवान गणेश के जबरदस्त योगदान को स्वीकार करने के लिए मनाई जाती है। उन्होंने आगे जोर देकर कहा कि गुरु पाठ्यपुस्तकों और पारंपरिक शिक्षा से परे ज्ञान और बुद्धि प्रदान करते हैं। वे हमें विषयों की गहरी समझ प्रदान करते हैं, आलोचनात्मक सोच को बढ़ावा देते हैं और हमें सवाल करने और खोज करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। यह बौद्धिक उत्तेजना हमारे विकास के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि हम एक सूचित और प्रबुद्ध व्यक्ति हैं। इस अवसर पर प्राचार्य श्री प्रदीप कुमार पाण्डै ने सभी को  ने कहा कि समाज में ऐसे गुरु की जरूरत है जो शिष्य के विकारों को दूर कर सके। उन्होंने विद्यार्थियों को कहा कि जीवन में हमें अपने माता-पिता और गुरु का हमेशा सम्मान करना चाहिए और उनके बताए हुए रास्ते पर बढ़ कर अपनी मंजिल को हासिल करना चाहिए। निर्देशिका डॉ. गरिमा चौरसिया ने गुरु पूर्णिमा की बधाई देते हुवे सभी का धन्यवाद व्यक्त किया और कार्यक्रम के सफल आयोजन पर हर्ष व्यक्त किया।