इन 15 विधानसभा चुनाव में दतिया विधानसभा सीट पर सबसे अधिक कांग्रेस के विधायक रहे। 9 बार दतिया की जनता ने कांग्रेस के विधायक को चुना। 2 बार जनसंघ, 3
दतिया। विधानसभा में वर्ष 2008 के चुनाव से लगातार 2023 तक चिर प्रतिद्वंदी रहे भाजपा के डॉ.नरोत्तम मिश्रा और कांग्रेस के राजेंद्र भारती, इस बार के उपचुनाव में आमने सामने नहीं होंगे। डॉ. मिश्रा ने 2008 में ही दतिया से अपना पहला विधानसभा चुनाव लड़ा था। उस समय भारती भी उनके सामने थे। इसके बाद अन्य चुनावों में भारती कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में उन्हें टक्कर देते रहे। 2023 का चुनाव जीतने के बाद भारती विधायक बने, लेकिन बैंक धोखाधड़ी मामले में दोषी करार दिए जाने के बाद राजेंद्र भारती की विधायकी चली गई। जिसके कारण दतिया सीट पर उपचुनाव की नौबत आई। वहीं दतिया विस सीट की बात करें तो यहां से अब तक लगातार तीन बार जीतने का रिकार्ड डॉ. नरोत्तम मिश्रा के नाम ही रहा है। वर्ष 1952 में अब तक 74 साल में 15 विधानसभा चुनाव हो चुके हैं। इन 15 विधानसभा चुनाव में दतिया विधानसभा सीट पर सबसे अधिक कांग्रेस के विधायक रहे। 9 बार दतिया की जनता ने कांग्रेस के विधायक को चुना। 2 बार जनसंघ, 3 बार भाजपा के साथ 1 बार सपा को भी जिताया। इस बार उपचुनाव में भी भाजपा व कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला है।
राजनीतिक सरगर्मी तेज
दतिया में राजनीतिक सरगर्मी भी तेज हो गई हैं। इस बार मैदान में भाजपा, कांग्रेस के साथ पहली बार असपा भी जोर अजमाने के लिए उतरने की तैयारी में है। भाजपा से पूर्व गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा का नाम संभावित माना जा रहा है। जबकि कांग्रेस की झोली में फिलहाल किसी जोरदार दावेदार का नाम नहीं है। ऐसे में पार्टीजन के बीच ऊहपोह की स्थिति बनी हुई है। उपचुनाव को लेकर आज तीन जुलाई को जिलाध्यक्ष ने आवश्यक बैठक भी बुलाई है। वहीं उपचुनाव की घोषणा के समय जहां पूर्व गृहमंत्री डा.मिश्रा इंदरगढ़ में आयोजित कार्यक्रम में व्यस्त रहे। जबकि भारती निवास पर सन्नाटा पसरा दिखा।
उपचुनाव को लेकर शहरवासियों की मिलीजुली प्रतिक्रियाएं: दतिया विस सीट पर हो रहे उपचुनाव को लेकर जब शहरवासियों की प्रतिक्रियाएं ली गईं तो अधिकांश का कहना था कि किसी निर्वाचित प्रतिनिधि के अयोग्य हो जाने पर इस तरह की प्रक्रिया अपनाई ही जाती है। वहीं विभिन्न पार्टीगत विचारधारा के लोगों का कहना था कि जनता को अपना प्रतिनिधि मिलना ही चाहिए। सीट खाली होने के बाद दतिया विधानसभा प्रतिनिधिविहीन हो गई थी। उपचुनाव हो जाने से जल्दी ही नए प्रतिनिधि को चुनने का मौका मिलेगा। वहीं कांग्रेस विधायक के कार्यकाल में विकास कार्यों की सुस्त गति को लेकर भी लोगों ने प्रतिक्रियाएं दीं।
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