मनासा। नीमच जिले के मनासा नगर में गिलियन-बैरे सिंड्रोम (जीबीएस) के संदिग्ध मामलों ने सनसनी फैला दी है। इस दुर्लभ लेकिन घातक न्यूरोलॉजिकल बीमारी ने दो मासूम जिंदगियों को निगल लिया, जिससे पूरा नगर दहशत और चिंता के साए में आ गया है। हालात की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने आपात अलर्ट जारी कर भोपाल, उज्जैन और नीमच से विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीमें मौके पर उतार दी हैं। नगर में घर-घर सर्वे, जांच और उपचार की कवायद तेज कर दी गई है, जबकि हर नागरिक की नजर अब प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है।
अब तक कुल 9 मरीजों में जीबीएस जैसे लक्षण-
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार अब तक नगर में कुल 9 मरीजों में जीबीएस जैसे लक्षण सामने आए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह बीमारी आमतौर पर पैरों से शुरू होकर धीरे-धीरे शरीर के ऊपरी हिस्सों तक फैलती है और रोग प्रतिरोधक क्षमता पर हमला करती है। प्रारंभिक लक्षणों में पैरों में झनझनाहट, सुन्नपन, कमजोरी, चलने में कठिनाई और कुछ मामलों में सांस लेने में परेशानी शामिल है।
घर-घर सर्वे, सभी 15 वार्डों में जांच-जांच के लिए मनासा पहुंचे उप संचालक स्वास्थ्य विभाग उज्जैन संभाग डॉ. संजीव कुमरावत ने बताया कि स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सीएमएचओ, डब्ल्यूएचओ की टीम और मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों द्वारा मनासा नगर के सभी 15 वार्डों में घर-घर जाकर जांच की जा रही है। प्रत्येक टीम में मेडिकल ऑफिसर, कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और आशा सहयोगी को शामिल किया गया है। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि किसी भी उम्र और लिंग का व्यक्ति इस बीमारी की चपेट में आ सकता है।
पेयजल पर संदेह, उबालकर पानी पीने की सलाह-उप संचालक स्वास्थ्य विभाग उज्जैन संभाग डॉ. संजीव कुमरावत ने कहा कि जीबीएस को संक्रामक बीमारी नहीं माना जाता, लेकिन आशंका जताई जा रही है कि दूषित पेयजल, अधपका भोजन या संक्रमण के बाद यह रोग उभर सकता है। इसी को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों को पानी उबालकर पीने, क्लोरीनयुक्त पानी उपयोग करने, साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखने और अधपका भोजन न करने की सलाह दी है। नगर पालिका द्वारा पानी की टंकियों में क्लोरीनेशन और घर-घर क्लोरीन टैबलेट वितरण की योजना भी शुरू कर दी गई है।
इलाज की व्यवस्था, घबराने की जरूरत नहीं-मनासा विधायक अनिरूद्ध माधव मारू ने कहा कि सभी नागरिकों से अपील है कि वे इस बीमारी को लेकर किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न दें। इस बीमारी का मूल कारण पानी नहीं है और यह कोई संक्रामक रोग नहीं है, जीबीएस छुआछूत से नहीं फैलता और समय पर इलाज से पूरी तरह ठीक हो सकता है। जरूरत पड़ने पर मरीजों को इंदौर मेडिकल कॉलेज, भोपाल या अन्य उच्च चिकित्सा संस्थानों में निशुल्क उपचार उपलब्ध कराया जाएगा। रेडक्रॉस के माध्यम से भी जरूरतमंद मरीजों को सहायता देने का भरोसा दिलाया गया है।
कांग्रेस का कड़ा रुख, कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन-इधर, जीबीएस के संदिग्ध मामलों और दो बच्चों की मौत के बाद कांग्रेस ने प्रशासन के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। जिला कांग्रेस कमेटी की ओर से कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपते हुए तत्काल ठोस कदम उठाने की मांग की गई। ज्ञापन में बताया गया कि मनासा क्षेत्र में जीबीएस के सात अन्य संदिग्ध मामले सामने आए हैं, जिससे आमजन में भय और चिंता व्याप्त है। कांग्रेस ने जिले में न्यूरो विशेषज्ञ की नियुक्ति, जीबीएस जांच की समुचित सुविधा, महंगे इंजेक्शन (आईवीआईजी) को निशुल्क उपलब्ध कराने, प्रभावित क्षेत्रों में शुद्ध पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित करने और स्वास्थ्य विभाग द्वारा डोर-टू-डोर सर्वे अभियान तेज करने की मांग की है।
बाहर रेफर होने से बढ़ रहा आर्थिक बोझ-कांग्रेस जिलाध्यक्ष तरूण बाहेती ने कहा कि जिले में उपचार की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण मरीजों को बाहर रेफर किया जा रहा है, जिससे गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ रहा है। उन्होंने प्रशासन से मामले को गंभीरता से लेते हुए त्वरित और प्रभावी कार्रवाई की मांग की, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके। साथ ही नीमच जिले में दूषित पेयजल आपूर्ति पर रोक लगाने की भी मांग की गई। ज्ञापन के दौरान जिले भर से कांग्रेस के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता बड़ी संख्या में मौजूद रहे।


