नीमच। पुरानी कृषि उपज मंडी में सोमवार शाम कानून व्यवस्था की सरेआम धज्जियां उड़ती नजर आई । मंडी निरीक्षक समीरदास से कार्यालय में घुसकर न सिर्फ अभद्रता की गई ,बल्कि शासकीय फाईलें फाड़ दी गई और हाथापाई तक की गई ।
घटना सोमवार शाम करीब 4 बजे की हैं । मंडी कार्यालय में नियमित कामकाज चल रहा था। तभी आशुतोष शर्मा नाम का व्यक्ति गाली गलौच करते हुए दफ्तर में गुसा, बेकाबू होकर उसने सरकारी फाईलें फाड़ दी। जिसमें किसानों और कर्मचारियों से जुड़े अहम दस्तावेज थे। हालात बिगड़े देख समीर दास जान बचाकर बाहर निकले,लेकिन आरोपी ने उनका पीछा करते हुए मंडी दफ्तर के पास घेर लिया चश्मा छीन लिया गया। और हाथापाई की गई । हैरानी की बात यह हैं की कुछ दिन पहले ही मंडी मंच सजे थे। बड़े बड़े वादे हुए थे। सुरक्षा और सम्मान की बाते की गई थी। लेकिन जब एक जिम्मेदार अधिकारी से मारपीट की गई तब वे घोषणावीर नजर नहीं आए सवाल यह है कि जब मंडी सचिव ही सुरक्षित नही तो छोटे किसान और व्यापारी किस भरोसे यहां आएंगे मंडी में लाला गुलाब और सिंडीकेट जैसे नाम वर्षों से चर्चा में चल रहे हैं। करीब दो दशक से असामाजिक तत्व कभी एक तो कभी दूसरे नाम से मंडी की व्यवस्था में दखल देते रहे हैं माना जा रहा हैं कि यह घटना भी उसी बिगड़ती व्यवस्था का नतीजा हैं आज स्थिति यह हैं कि खुलेआम मंडी कार्यालय में घुसकर तोड़फोड़ शासकीय कार्य में बाधा और कर्मचारी से मारपीट की जा रही हैं।
बघाना पुलिस ने दर्ज किया मामला- मामले में बघाना थाना पुलिस ने फरियादी मंडी निरीक्षक समीर दास पिता सत्यनारायण दास,निवासी कृषि उपज मंडी की शिकायत पर आशुतोष शर्मा पिता रामेश्वर शर्मा,निवासी कुमारियां विरान के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया है। शिकायत में बताया गया कि सुरक्षा गार्ड की नौकरी से निकालने और वेतन रोके जाने की बात से नाराज होकर आरोपी ने गाली-गलौच की और थप्पड़ मारा। शोर मचाने पर अन्य कर्मचारियों ने बीच-बचाव किया। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ बीएनएस की धारा 115(2), 296(बी), 351(3) और 324 (3) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अब सवाल नीमच की जनता और व्यापारियों के सामने है। क्या मंडी को असामाजिक तत्वों के हवाले छोड़ दिया जाएगा? आज मंडी सचिव का चश्मा टूटा हैं कल किसी की हिम्मत टूट सकती हैं और परसों मंडी का गौरव। जरूरत है सख्त कार्रवाई की
खोखले निकले वो चुनावी वादे,अभी कुछ दिन पहले ही मंडी में ढोल-धमाके बज रहे थे। हाथ जोड़कर नेताजी कह रहे थे— “मंडी को सुरक्षित बनाएंगे, व्यापारियों का मान बढ़ाएंगे।”आज जब अधिकारी का चश्मा छीन लिया।बी गया,उसकी इज्जत उछाली गई, तब वो ‘घोषणावीर’ नेता कहाँ छिप गए? क्या चुनाव सिर्फ कुर्सी पाने के लिए था? अगर आज एक बड़ा अधिकारी सुरक्षित नहीं है,तो कल को मंडी में आने वाला गरीब किसान और छोटा व्यापारी इन गुंडों से कैसे लड़ेगा?


