चित्तौड़गढ़ सैनिक स्कूल के तीन कैडेट्स भारतीय सेना में अधिकारी कैडर के लिए चुने गए हैं। तीनों आर्मी में जाना चाहते हैं। मेरिट लिस्ट आने के बाद तीनों की ट्रेनिंग होगी, जिसके बाद उन्हें लेफ्टिनेंट की पोस्ट मिल जाएगी। सभी ने साल 2023 में संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित राष्ट्रीय रक्षा अकादमी और नौसेना अकादमी एग्जाम में रिटन टेस्ट पास किया था। जनवरी में इंटरव्यू होने के बाद फरवरी में रिजल्ट आया। ऑल इंडिया एग्जाम देने वाले करीब आठ लाख स्टूडेंट्स में से तीन स्टूडेंट इस सैनिक स्कूल से ही चुने गए हैं।

8 लाख स्टूडेंट्स में चुने गए सैनिक स्कूल के 3 कैडेट्स

आर्मी फैमिली बैकग्राउंड से जुड़े तीनों कैडेट्स का लक्ष्य देश

की सेवा करना है। ऑल इंडिया करीब 8 लाख से भी ज्यादा

स्टूडेंट्स ने रिटन एग्जाम दिया था। उसमें से करीब 7500

स्टूडेंट्स सेलेक्ट हुए। इतने ही बच्चों का इंटरव्यू हुआ, जिसमें

से 696 स्टूडेंट्स को चुन लिया गया। तीनों स्टूडेंट्स का कहना

है कि मेहनत कर वो अपने आप को सैनिक स्कूल में लगे

प्राइड ऑफ वॉल में देखना चाहते हैं। तीनों कैडेट से उनके

हिंदी से इंग्लिश मीडियम में पढ़ना सबसे बड़ा था।

चैलेंज

कैडेट सुमित चौधरी (17) ने टोंक जिले के देवली तहसील के एक छोटे से गांव बिजवाड़ में किसान परिवार में जन्म लिया। पिता बद्रीलाल जाट किसान हैं। मां संपत्ति देवी हाउस वाइफ हैं। परिवार में अंकल शंकर लाल जाट आर्मी में सिपाही थे। जिनका हार्ट अटैक से 2017 में निधन हो गया। कैडेट सुमित ने बताया कि गांव में ही एक हिंदी मीडियम स्कूल में पांचवी तक की पढ़ाई की। अंकल चाहते थे कि मैं सैनिक स्कूल में पढ़ाई करूं। इसके लिए उन्होंने मेरी मदद की और मुझे सैनिक स्कूल के एंट्रेंस एग्जाम के लिए तैयारी करवाई। एंट्रेंस एग्जाम में पास होने के बाद मेरा एडमिशन 6th क्लास में सैनिक स्कूल में हुआ। पांचवी क्लास तक हिंदी मीडियम होने के कारण इंग्लिश मीडियम स्कूल में आने के बाद काफी प्रॉब्लम फेस करना पड़ा। शुरू में एडजस्ट करने में दिक्कत हुई लेकिन सभी टीचर्स ने काफी हेल्प की। 10th क्लास में भी मेरा 93.6 प्रतिशत बने। पिता भी किसान होने के कारण फाइनेंशली काफी परेशानी भी हुई, लेकिन उन्होंने मुझे कभी दिक्कत नहीं आने दी।

स्कूल के टीचर ने करवाई तैयारी

कैडेट सुमित ने बताया कि संघ लोक सेवा आयोग द्वारा साल 2023 के 3 सितंबर को आयोजित राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) और नौसेना अकादमी एग्जाम (INA) के रिटन एग्जाम के लिए हमारे मैथ के टीचर डीपी सिंह ने डेढ़ महीने तक हमारी तैयारी करवाई। इसके अलावा सेल्फ स्टडी भी की, जिसके कारण आज सिलेक्शन हुआ है। स्कूल से लगभग 16 स्टूडेंट ने साल 2023 के 3 सितंबर को हुई रिटन एग्जाम में पास हुए थे लेकिन आगे इंटरव्यू में सिर्फ तीन स्टूडेंट्स ही सिलेक्ट हुए। बता दें की अप्रैल 2023 में भी रिटन एग्जाम में कैडेट अनिल कुमार, कैडेट विशाल सिंह और कैडेट अर्पित सिंह राष्ट्रीय रक्षा अकादमी के 151 वें पाठ्यक्रम और नौसेना अकादमी के 113वें कोर्स के लिए चयनित हुए थे। इनमें से कैडेट अर्पित सिंह ने फरवरी में हुए इंटरव्यू में पार्टिसिपेट किया और तीनों कैडेट्स के साथ ही सेलेक्ट हुए।

 

 

मामा को माना आदर्श, किसान पिता ने किया सपोर्ट

कैडेट नितेश कुमार पावड़िया (17) गांव खुरड़ी, फतेहपुरा, सीकर के किसान परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनके पिता किशोर सिंह किसान हैं, और मां संतोष देवी पुलिस में हैं। कैडेट नितेश का कहना है कि उसके नाना और मामा आर्मी बैकग्राउंड से हैं। उन्होंने बताया कि उसके मामा सोनू आर्मी में मेजर की पोस्ट पर हैं। वे अपने मामा को आदर्श मानते आए हैं और उनको फॉलो करते हुए सैनिक स्कूल में एडमिशन एडमिशन लिया। कैडेट नितेश कुमार का कहना है कि घर में रहते समय कभी भी फिजिकल एक्टिविटीज नहीं की थीं, लेकिन यहां पर आने के बाद काफी महीनों तक परेशानी हुई। सुबह उठते ही फिजिकल एक्सरसाइज और कई एक्टिविटीज होती हैं लेकिन धीरे-धीरे अब यह लाइफस्टाइल का हिस्सा बन चुका है। 10th क्लास में 88 प्रतिशत लाने वाले नितेश कुमार अपने माता-पिता का इकलौता लड़का है। उनका कहना है कि मम्मी पापा और मामा ने काफी सपोर्ट किया है। उन्होंने हमें गाइड भी किया है। स्कूल की ओर से भी हमें फुल सपोर्ट मिला।

पिता का सपना – आर्मी में हो बेटा

कैडेट आदित्य राज सिंह (17) का फैमिली का सैनिक स्कूल चितौड़गढ़ से काफी पुराना नाता है। आदित्य राज सिंह के पिता अजेंद्र सिंह भले ही कॉरपोरेट सेक्टर में जॉब कर रहे हों, लेकिन साल 1987 से 1994 तक वो इसी स्कूल में पढ़े हैं। वहीं, उनके कजिन भाई भी साल 2006 से 2013 तक चित्तौड़गढ़ सैनिक स्कूल में ही पढ़े हैं। आदित्य राज सिंह के कजिन भाई वीरेंद्र विक्रम सिंह अभी आर्मी में मेजर के पद पर है। कैडेट सिंह का कहना है कि उनकी मां शालिनी सिंह ग्रेड थर्ड गवर्नमेंट टीचर हैं। बचपन से ही उन्हें माहौल बिल्कुल आर्मी वाला ही मिला है। पिता कॉरपोरेट सेक्टर में थे इसलिए उनका ट्रांसफर होता रहा है। बचपन में उनके पिता की दिल्ली पोस्टिंग थी तो उनकी शुरुआती स्कूलिंग दिल्ली में ही हुई। उन्हें चित्तौड़गढ़  सैनिक स्कूल में ही पढ़ाई करनी थी इसलिए यहां ऐडमिशन लिया। आदित्य राज सिंह का कहना है कि घर से कभी दूर नहीं रहा। अपने माता-पिता को छोड़कर चित्तौड़गढ़ रहना बहुत मुश्किल था। एडजेस्ट होने में भी समय लगा। अब यह स्कूल ही घर बन चुका है। अब स्कूल छोड़कर जाने का मन नहीं करता। उनका कहना है कि भारतीय सेवा में जाना मेरे पिता का सपना है। मेरे भाई मेजर वीरेंद्र विक्रम सिंह ने मेरी काफी हेल्प की। मुझे सही ढंग से गाइड किया। शुरू में इंग्लिश मीडियम में पढ़ाई करने के कारण हिंदी मेरी काफी कमजोर थी लेकिन मेरी मां ने मुझे हिंदी सिखाई। स्कूल की ओर से भी मेरे डवलपमेंट पर काफी ध्यान दिया गया। अब मैं स्टेज परफॉर्मेंस भी करता हूं। प्राइड ऑफ वॉल तक पहुंचने का जज्बा आदित्य राज सिंह से जब उनका सपना पूछा गया तो उन्होंने अपने स्कूल के प्राइड ऑफ वॉल को देखते हुए कहा कि इतनी मेहनत करना चाहता हूं कि मेरा भी फोटो यहां लग सके। तीनों कैडेट्स ने अपने सैनिक स्कूल के प्रिंसिपल कर्नल अनिल देव सिंह जसरोटिया और सभी टीचर्स को इस दिन के लिए थैंक यू कहा। उन्होंने कहा कि अगर हमारे स्कूल से सपोर्ट नहीं मिलता तो यहां तक पहुंचना मुश्किल था।

3 सितंबर को हुआ था रिटन

स्कूल के जन संपर्क अधिकारी बाबूलाल शिवरान ने बताया कि संघ लोक सेवा आयोग द्वारा साल 2023 के 3 सितंबर को आयोजित राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) और नौसेना अकादमी एग्जाम (INA) के रिटन एग्जाम के लिए 16 स्टूडेंट्स पास हुए थे। अब राष्ट्रीय रक्षा अकादमी के 152वें सिलेबस और नौसेना अकादमी के 114वें सशस्त्र बलों के अधिकारी कैडर में प्रवेश के लिए रक्षा मंत्रालय के सेवा चयन बोर्ड (SSB) ने इंटरव्यू लिए। दोनों एग्जाम साथ में ही होते हैं। तीनों बच्चे नौसेना और आर्मी के लिए क्वालिफाइड हैं। सफल हुए तीनों कैडेट्स को ही भारतीय सेवा में जाना है।

अब आगे क्या?

अधिकारी कैडर में सफल होने के बाद 3 साल के लिए महाराष्ट्र के पुणे के पास खड़कवासला में नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA) में तीनों कैडेट्स की ट्रेनिंग होगी। इसके बाद देहरादून में ऑफिसर ट्रेनिंग अकादमी में भी ट्रेनिंग होगी। अपनी ट्रेनिंग पूरी करने के बाद कैडेट्स लेफ्टिनेंट बन जाएंगे। तीनों कैडेट्स अभी इन दिनों में अपने 12वीं बोर्ड के एग्जाम में बीजी है।

क्या है प्राइड ऑफ वॉल?

यह पहली बार नहीं है जब सैनिक स्कूल के स्टूडेंट्स को सफलता मिली है। सैनिक स्कूल की स्थापना से लेकर अब तक इस स्कूल ने देश को उपराष्ट्रपति, राज्यपाल, सेना प्रमुख, लेफ्टिनेंट जनरल, मेजर जनरल, आईएएस, आईपीएस, डॉक्टर्स और अनेकों उच्च पदाधिकारी प्रदान किए हैं। स्कूल से पढ़े छात्र भारतीय सेना के अलावा अन्य क्षेत्रों में भी अच्छा कार्य कर रहे हैं। यहां के छात्र रहे जगदीप धनखड़ देश के 14वें उपराष्ट्रपति बने। स्कूल के पूर्व छात्र हीरालाल सामरिया, आईएएस मुख्य सूचना आयुक्त बनें। जनरल दलबीर सिंह पीवीएसएम, एवीएसएम, वीएसएम, एडीसी (सेवानिवृत्त) सेना प्रमुख बने। लेफ्टिनेंट जनरल मांधाता सिंह पीवीएसएम, वाईएसएम, वीएसएम (सेवानिवृत्त) स्कूल के प्रथम छात्र रहे हैं। यहां तक कि आईपीएस और चित्तौड़गढ़ एसपी रहे राजन दुष्यंत भी इसी स्कूल से पढ़े हुए है। सभी स्टूडेंट्स जो आज देश के बड़े बड़े पदों पर हैं, उनका फोटो स्कूल के प्राइड ऑफ वॉल पर लगाया जाता है।