प्रतापगढ़।  जिले में निजी स्कूलों की मनमानी और नियमों की अनदेखी को लेकर आमजन का गुस्सा अब खुलकर सामने आने लगा है। खासकर सोशल मीडिया पर अभिभावक लगातार अपने अनुभव और समस्याएं साझा कर रहे हैं। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि शिक्षा विभाग की ओर से बार-बार निर्देश देने के बावजूद कई निजी विद्यालय आदेशों की अवहेलना कर रहे हैं। 9 अप्रैल 2024 को कार्यवाहक जिला शिक्षा अधिकारी महेशचंद्र आमेटा द्वारा जिले के सभी निजी विद्यालयों को निर्देश पत्र जारी किया गया था। इसमें निजी स्कूलों को आरटीई के तहत जारी मान्यता आदेश और राज्य सरकार के दिशा-निर्देशों की पालना करने को कहा गया था। राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड से मान्यता प्राप्त विद्यालय केवल राजस्थान राज्य पाठ्यपुस्तक मण्डल द्वारा प्रकाशित पुस्तकें ही विद्यार्थियों को पढ़ाएं। इसी तरह सीबीएसई से मान्यता प्राप्त विद्यालयों को एनसीईआरटी की पुस्तकें ही लागू करनी होगी
होंगी।
जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा दिए गए चार प्रमुख निर्देशों में यह स्पष्ट किया गया था कि विद्यालय जिस बोर्ड से मान्यता प्राप्त है, उसके अनुसार ही पाठ्यपुस्तकों से शिक्षण कार्य करवाए। विद्यालय अपनी मर्जी से किसी भी पुस्तक को विद्यार्थियों पर जबरन न थोपें। पाठ्यपुस्तकें एवं स्टेशनरी किसी एक निर्धारित दुकान से खरीदने के लिए अभिभावकों को बाध्य न करें, कम से कम तीन दुकानों पर सामग्री उपलब्ध होनी चाहिए। विद्यार्थियों के परिवहन के लिए विद्यालय द्वारा उपलब्ध साधन आरटीओ द्वारा निर्धारित मानकों को पूरा करे। इसके अलावा सत्र 2025-26 की फीस के दस्तावेजों का अवलोकन कर यह सुनिश्चित किया जाए कि विद्यालय कक्षा अनुसार निर्धारित से अधिक फीस न लें। हालांकि जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग नजर आ रही है। शहर के नागरिक कालू, वाहिद, दिलीप कुमार, गोविंद और मुकेश ने बताया कि प्रतापगढ़ शहर में 3 से 4 निजी विद्यालय ऐसे हैं, जिनकी किताबें केवल एक ही दुकान पर मिलती हैं। धरियावद रोड स्थित एक स्कूल तो पिछले दो वर्षों से किताबें और यूनिफार्म सीधे स्कूल से ही दे रहा है। जब अभिभावकों ने इसका विरोध किया, तो आनन-फानन में सदर बाजार स्थित एक दुकान को अधिकृत कर किताबें वहीं उपलब्ध करवा दी गईं। स्थानीय अभिभावकों का कहना है कि यदि शिक्षा विभाग इस मामले अभिभावकों का कहना है कि यदि शिक्षा विभाग इस मामले में जल्द संज्ञान नहीं लेता, तो वे शिक्षा मंत्री को शिकायत भेजकर कड़ी कार्रवाई की मांग करेंगे।
अभिभावकों का यह भी आरोप है कि विभाग के कई कर्मचारी इन स्थितियों से अवगत होने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। जिले में सोमवार से एक टीम बनाकर अभिभावकों की शिकायतों को ध्यान में रखते हुए स्कूलों का निरीक्षण कर सभी प्राइवेट स्कूलों को निर्देश जारी करेंगे कि वह नियमों की पालना करते हुए कम से कम तीन दुकानों पर किताबें मिलना अनिवार्य करें। अभिभावकों को एक दुकान से स्कूल यूनिफार्म, किताबें लेने के लिए बाध्य नहीं करें। बाकी पूर्व में ही लगभग सभी स्कूलों को आदेश जारी कर रखे हैं। नियमों की अवहेलना पर विभाग कार्रवाई करेगा। सुनील भट्ट, कार्यवाहक जिला शिक्षा अधिकारी