नीमच। जिला कलेक्टर हिमांशु चंद्रा, अतिरिक्त जिला दण्डाधिकारी बी.एस. कलेश के निर्देशन एवं जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास अंकिता पंड्या के मार्गदर्शन में भारत सरकार द्वारा स्वीकृत वन स्टॉप सेंटर (सखी), नीमच का सफल संचालन किया जा रहा है। यह केंद्र संकटग्रस्त महिलाओं के लिए आश्रय, सुरक्षा और पुनर्वास का मजबूत आधार बन रहा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार महिला संगीता को तीर्थ यात्रा करवाने के बहाने बिहार के भागलपुर जिले से महिला तस्करी के उद्देश्य से ग्राम सरवानिया महाराज, तहसील जावद, जिला नीमच लाया गया था। यहां उसे डरा-धमकाकर जबरन विवाह के लिए लड़कों और उनके परिवारों से मिलवाया जा रहा था। आरोप है कि परिवर्तित नाम हंसा एवं उसका पति बिहार से युवतियों को बुलाकर पैसों के बदले विवाह के नाम पर महिला तस्करी का कार्य करते थे। एक दिन अवसर पाकर महिला संगीता उनके चंगुल से भाग निकली और मोहल्ले वालों की सहायता से सरवानिया चौकी पहुंची। महिला पुलिस थाना द्वारा अतिरिक्त जिला दण्डाधिकारी के आदेश पर सुरक्षा की दृष्टि से उसे वन स्टॉप सेंटर (सखी) में आश्रय प्रदान किया गया। केंद्र में महिला को सुरक्षित आवास, चिकित्सा सुविधा, काउंसलिंग एवं पुलिस सहायता उपलब्ध कराई गई। वन स्टॉप सेंटर की प्रभारी प्रशासक दीपिका नामदेव, काउंसलर नुशरत खान, सोशल केस वर्कर रीना पाठक एवं पूजा मिश्रा, उपनिरीक्षक अनीता मसार, महिला आरक्षक कृष्णा गायरी, बहुउद्देशीय कार्यकर्ता चंदा नागर सहित स्टाफ एवं पुलिस प्रशासन ने अथक प्रयास कर महिला के परिजनों का पता लगाया और उन्हें बेटी के सुरक्षित होने की सूचना दी।
बिहार से परिजन नीमच पहुंचे। अतिरिक्त जिला दण्डाधिकारी के आदेश पश्चात महिला संगीता को पुलिस अभिरक्षा में उसकी माता को सुपुर्द किया गया।
इस प्रकार वन स्टॉप सेंटर (सखी) नीमच अंजान शहर में महिला तस्करी से पीड़ित संगीता के लिए एक सुरक्षित सहारा और नई जीवन-शुरुआत का माध्यम बना।