जीरन। नगर परिषद क्षेत्र में पेयजल व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। नलों में गंदा और कीड़े युक्त पानी आने की शिकायत के बाद नगर परिषद अध्यक्ष रामकरण सगवारिया का जवाब अब विवाद का कारण बन गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि समस्या के समाधान के बजाय अध्यक्ष जिम्मेदारी टालते नजर आ रहे हैं।
तीन दिन से आ रहा गंदा पानी
पीड़ित ईश्वरलाल राठौर का कहना है कि बीते तीन दिनों से नल के पानी में कीड़े आ रहे हैं। इस संबंध में उन्होंने पार्षद को दो बार जानकारी दी, लेकिन समस्या जस की तस बनी रही। पानी की हालत ऐसी है कि पीने लायक नहीं रहा।
*कॉल रिकॉर्डिंग में अध्यक्ष का जवाब*
पीड़ित द्वारा उपलब्ध कराई गई कॉल रिकॉर्डिंग में सुना गया कि जब नल के पानी की स्थिति से अध्यक्ष रामकरण सगवारिया को अवगत कराया गया, तो उन्होंने कहा— “पानी पीना बंद कर दो, टंकी से भरकर ले आओ।” इस जवाब के बाद ग्रामीणों में नाराजगी और बढ़ गई।
*सीएमओ से शिकायत करने की सलाह*
जब पीड़ित ने पार्षद के बात न सुनने की शिकायत की, तो अध्यक्ष ने कहा कि “पार्षद नहीं सुन रहा है तो सीएमओ को शिकायत करो।” इस पर क्षेत्रवासियों का सवाल है कि जब सीएमओ नगर परिषद अध्यक्ष के अधीन आता है, तो अध्यक्ष खुद कार्रवाई करने के बजाय शिकायतकर्ता को क्यों भटका रहे हैं।
*ग्रामीणों में आक्रोश*
स्थानीय रहवासियों का कहना है कि अध्यक्ष केवल नाम के अध्यक्ष बनकर रह गए हैं। समस्याओं के समाधान के बजाय उल्टे-सीधे जवाब दिए जा रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि हर समस्या के लिए ग्रामीणों को खुद ही अधिकारियों के चक्कर काटने पड़ेंगे, तो नगर परिषद अध्यक्ष की भूमिका क्या है?
*नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर सवाल*
इस पूरे मामले ने जीरन नगर परिषद की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं कि वह मामले का संज्ञान लेकर पेयजल समस्या का स्थायी समाधान करता है या ग्रामीणों को दूषित पानी पीने को मजबूर रहना पड़ेगा।