नीमच। बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वाले स्कूल संचालकों की अब खैर नहीं! सूबे के मुखिया और पुलिस कप्तान के सख्त आदेश के बाद मध्य प्रदेश के नीमच का यातायात महकमा आज गुरुवार को पूरी तरह 'सिंघम' मोड में नजर आया। नीमच SP राजेश व्यास के मार्गदर्शन में आज गुरुवार को यातायात थाना प्रभारी सूबेदार सोनू बड़गुजर अपनी टीम के साथ अचानक 'ज्ञानोदय स्कूल' जा धमके। पुलिस की गाड़ियां स्कूल परिसर में रुकते ही वहां हड़कंप मच गया। टीम ने सीधे स्कूल बसों का घेराव किया और एक-एक कर सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस (WP (C) 13029/1985 एम.सी. मेहता बनाम यूनियन ऑफ इंडिया) के तहत चेकिंग शुरू कर दी।
जांच में खुली पोल: न फर्स्ट एड, न सही फिटनेस:- सूबेदार सोनू बड़गुजर की पैनी नजरों से स्कूल बसों की कमियां छिप नहीं सकीं। जांच के दौरान कई बसों में गंभीर लापरवाही सामने आई! कई बसों में फर्स्ट एड बॉक्स और अग्निशमन यंत्र (Fire Extinguisher) गायब या एक्सपायर्ड थे। जीपीएस सिस्टम, सीसीटीवी कैमरे और स्पीड गवर्नर (गति नियंत्रक) में खामियां मिलीं। गाड़ियों के फिटनेस, इंश्योरेंस और चालकों के लाइसेंस तक के दस्तावेजों को खंगाला गया।
2 दिन का अल्टीमेटम: वरना सीधे कोर्ट में होगा फैसला:- जिन भी बसों में नियमों का उल्लंघन पाया गया, उन स्कूल संचालकों को सूबेदार सोनू बड़गुजर ने सख्त लहजे में 02 दिन की मोहलत दी है। साफ चेतावनी दी गई है कि अगर 48 घंटे के भीतर गाइडलाइन के मुताबिक सभी कमियां पूरी नहीं की गईं, तो सीधे मोटर व्हीकल एक्ट के तहत गाड़ियां जब्त होंगी और मामला कोर्ट में पेश किया जाएगा। बच्चों की सुरक्षा के लिए इन नियमों का पालन जरूरी:- 👇ये पीला रंग व पहचान: बस पीली हो, आगे-पीछे बड़े अक्षरों में "SCHOOL BUS" और स्कूल का नाम-नंबर अनिवार्य हो। रफ्तार पर लगाम: - स्पीड गवर्नर अनिवार्य, अधिकतम स्पीड 40 किमी/घंटा ही होनी चाहिए। अनुभवी ड्राइवर: - ड्राइवर को कम से कम 5 साल का हैवी व्हीकल चलाने का अनुभव हो। मोबाइल का इस्तेमाल पूरी तरह बैन। अटेंडेंट जरूरी: - बच्चों को चढ़ाने-उतारने के लिए हर बस में प्रशिक्षित हेल्पर हो। सुरक्षा किट: :- फर्स्ट एड बॉक्स, अग्निशामक यंत्र, इमरजेंसी डोर और खिड़कियों पर सुरक्षा जाली (ग्रिल) जरूरी। बंद दरवाजे: खुले दरवाजे रखकर बच्चों को ले जाना पूरी तरह प्रतिबंधित है। नो ओवरलोडिंग: - सीट क्षमता से अधिक बच्चे नहीं बैठेंगे। बैग रखने की अलग व्यवस्था हो। हाईटेक निगरानी: - सीसीटीवी कैमरे और जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम चालू हालत में हों। वैध कागज: आरटीओ (RTO) द्वारा जारी वैध कमर्शियल परमिट और फिटनेस सर्टिफिकेट होना अनिवार्य है। . .