नीमच।मनासा रोड स्थित एक निजी होटल में कांग्रेस का दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविर मंगलवार को बड़े लाव-लश्कर के साथ शुरू तो हो गया, लेकिन इस बंद कमरे के प्रशिक्षण के बाहर कार्यकर्ताओं का आक्रोश और असंतोष अब खुलकर सड़क पर आने लगा है। एक तरफ मंच से प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी और वरिष्ठ नेता महेंद्र जोशी कार्यकर्ताओं को विचारधारा, बूथ सशक्तिकरण और जनसंपर्क की घुट्टी पिला रहे थे,तो वहीं दूसरी तरफ जमीनी कार्यकर्ताओं ने पार्टी के भीतर चल रही शकुनि राजनीति के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।शिविर में भले ही संगठन की मजबूती का आधार बूथ स्तर के कार्यकर्ता को बताया जा रहा हो, लेकिन हकीकत इससे कोसों दूर नजर आ रही है।कांग्रेस पार्टी के भीतर से ही उठ रही तीखी आवाजों के अनुसार जिला और ब्लॉक एवं मंडलम व सेक्टर प्रमुख कांग्रेस कमेटियों में ऐसे मौकापरस्त लोगों को ठूंस-ठूंस कर भरा गया है, जिनका जनता के बीच कोई वजूद ही नहीं है। वहीं क्षेत्र में अच्छी-खासी लोकप्रियता और जनाधार रखने वाले निष्ठावान नेताओं को सिरे से नजरअंदाज कर दिया गया है।कार्यकर्ताओं का आरोप है कि कांग्रेस में गुटबाजी के बादशाह बने बैठे नेताओं की एक बार फिर ताजपोशी कर दी गई है। ये लोग कांग्रेस का संगठन नहीं, बल्कि पार्टी की बलि देकर खुद का निजी संगठन मजबूत करने में लगे हुए हैं।नाराज गुट का सीधा और तीखा हमला उन पदाधिकारियों पर है जो पहले भी संगठन के बड़े पदों पर आसीन थे। आरोप है कि ये तथाकथित नेता कांग्रेस को मजबूत करने के बजाय परदे के पीछे भाजपा की गोद में बैठकर सिर्फ औपचारिकता निभा रहे थे। कांग्रेस को रसातल में पहुंचाने वाले और तलवे चाटने वाले इन्हीं मौकापरस्त चेहरों को एक बार फिर मलाईदार पदों से नवाजा गया है। इसके उलट, जो कार्यकर्ता वर्षों से निःस्वार्थ भाव से पूरी निष्ठा और ईमानदारी से लाठियां खा रहे हैं, उन्हें राहुल गांधी और जीतू पटवारी के ड्रीम प्रोजेक्ट संगठन सृजन अभियान से पूरी तरह दूर धकेल दिया गया है।*
*आलाकमान के अभियान को ठेंगा, बाहेती की शकुनि राजनीति से हार तय..?*
*आरोप बेहद गंभीर हैं कि स्थानीय आकाओं ने राहुल गांधी और प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के संगठन सृजन अभियान को ताक पर रख दिया है। कांग्रेस को अपनी पैतृक संपत्ति समझकर, सिर्फ अपने स्वार्थ के लिए गुटबाजी को बढ़ावा दिया जा रहा है।राजनीतिक गलियारों में चर्चा आम है कि बाहेती की शकुनि राजनीति के चलते कांग्रेस के भीतर ही महाभारत छिड़ चुकी है। यदि यही आलम रहा और मौकापरस्तों को ही तवज्जो मिलती रही, तो आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी की करारी शिकस्त तय है और इसके लिए किसी अन्य को नहीं, बल्कि खुद के ही शकुनि नेताओं को जिम्मेदार माना जाएगा। देखना दिलचस्प होगा कि मंच से एकजुटता का दावा करने वाले जीतू पटवारी इस अंदरूनी गुटबाजी और सुलगते आक्रोश की आग को कैसे बुझा पाते हैं, या फिर यह शकुनि राजनीति आगामी चुनाव में कांग्रेस की लुटिया डुबोने का काम करेगी।


