नीमच। कहते हैं राजनीति और खाकी का चोली-दामन का साथ है, लेकिन जब बात ‘पावर गेम’ की आती है, तो दो पड़ोसी राज्यों की तस्वीरें इतनी जुदा हो सकती हैं, इसकी किसी ने कल्पना नहीं की थी! सोशल मीडिया से लेकर प्रशासनिक गलियारों में इस वक्त मध्य प्रदेश और राजस्थान के ‘सिस्टम’ की जमकर तुलना हो रही है। एक तरफ जहां राजस्थान में एक एसपी का बाल बांका नहीं हुआ, वहीं मध्य प्रदेश में एक जांबाज अधिकारी को ‘सिंघम’ बनने की ऐसी सजा मिली कि सीधे शिवपुरी से जबलपुर रवाना कर दिया गया!
एमपी का मामला: विधायक के बेटे पर हाथ डाला… और सीधे जबलपुर का टिकट कटा! मध्य प्रदेश के पुलिस महकमे में शुक्रवार को आए ‘तबादला एक्सप्रेस’ ने सबको चौंका दिया। गृह विभाग ने 8 IPS और 66 ASP अधिकारियों को इधर से उधर किया है, लेकिन सबसे ज्यादा मिर्च-मसाला जिस नाम पर लगा है, वो है IPS आयुष जाखड़!
गुनाह क्या था? –
आयुष जाखड़ ने शिवपुरी के करैरा में दबंग विधायक प्रीतम लोधी के बेटे से पूछताछ करने की ‘जुर्रत’ कर दी थी।
नतीजा: –
विधायक जी भड़क गए, खाकी और खादी का विवाद सरेआम हो गया। बात इतनी बढ़ी कि IPS एसोसिएशन को मैदान में उतरना पड़ा।
फैसला: –
शुक्रवार को आई लिस्ट में आयुष जाखड़ को करैरा SDOP के पद से हटाकर जबलपुर का ASP बना दिया गया।
लोग कह रहे हैं कि ये ट्रांसफर नहीं, बल्कि नेताजी की ‘नाराजगी’ का इनाम है! वैसे, इस लिस्ट में अनु बेलिवाल को भी ग्वालियर से जबलपुर ASP बनाया गया है।
राजस्थान का जलवा: मंत्री के खिलाफ FIR, फिर भी SP की कुर्सी ‘अंगद का पैर’
अब जरा सीमा पार करिए और चलिए राजस्थान! वहां की कहानी बिल्कुल उलट है और यही बात एमपी के लोगों को चुभ रही है।
राजस्थान के सहकारिता मंत्री गौतम दक के खिलाफ गंभीर धाराओं में FIR दर्ज हो गई, लेकिन वहां के SP धर्मेंद्र सिंह अपनी कुर्सी पर सीना ताने खड़े हैं।
फर्क साफ है: –
राजस्थान में मंत्री की एफआईआर के बावजूद एसपी का बाल तक बांका नहीं हुआ, और इधर एमपी में विधायक के बेटे से सिर्फ पूछताछ करने भर से पूरी की पूरी प्रशासनिक मशीनरी हिल गई और अधिकारी का बोरिया-बिस्तर बंधवा दिया गया!
जनता पूछ रही है- ‘सिस्टम’ का बॉस कौन?
इस पूरे घटनाक्रम के बाद अब सोशल मीडिया पर मीम्स की बाढ़ आ गई है और लोग पूछ रहे हैं कि असली ‘सिंघम’ राज कहां चल रहा है?
मध्य प्रदेश में जहां IPS एसोसिएशन की आपत्ति को भी दरकिनार कर अधिकारी को हटा दिया गया, वहीं राजस्थान के प्रशासनिक तेवरों को देखकर लोग कह रहे हैं- “कानून का राज देखना हो तो राजस्थान देखिए!


