पिपलिया मंडी/मंदसौर। कहते हैं कि दुनिया में माँ का रिश्ता सबसे अनमोल है, लेकिन समाज की रूढ़िवादी सोच अक्सर मातृत्व को केवल जन्म देने तक सीमित रखती है। इस धारणा को पूरी तरह बदल दिया है मंदसौर की किन्नर गुरु अनीता दीदी ने। जिनके आँगन में खुद की कोई औलाद नहीं खिली, उन्होंने सैकड़ों बेसहारा बेटियों के जीवन में खुशियों के फूल खिला दिए हैं।

एक दिन की मासूम को मिला मां का आंचल
करीब तीन साल पहले की एक घटना ने पूरे जिले को झकझोर दिया था। एक मां, जिसे पहले भी बेटियां थीं, तीसरी बेटी के जन्म पर उदास हो गई। जब यह सूचना अनीता दीदी तक पहुँची, तो वे बिना पल गंवाए उस एक दिन की मासूम को अपने सीने से लगाकर घर ले आईं। आज वह ‘पूनम’ दीदी के लाड़-प्यार में तीन साल की हो चुकी है। दीदी की ममता सिर्फ पूनम तक सीमित नहीं है, उनके घर में एक और बेटी और एक बेटा अपनी ‘मां’ की छत्रछाया में पल रहे हैं।

सैकड़ों बेटियों के कन्यादान की जिम्मेदारी
अनीता दीदी के लिए ‘मां’ शब्द कोई संबोधन नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी है। वे ऐसी सैकड़ों कन्याओं को गोद ले चुकी हैं, जिनके बचपन की पढ़ाई से लेकर जवानी में उनकी शादी तक का पूरा खर्च दीदी स्वयं उठाती हैं। अपने हाथों से बेटियों का कन्यादान करना और उन्हें विदा करना उनकी जीवन की सबसे बड़ी पूंजी बन गई है।

सेवा का दूसरा नाम: संकट में सबसे आगे
अनीता दीदी का व्यक्तित्व केवल परिवार तक सीमित नहीं है। मंदसौर जिले पर जब भी कोई विपत्ति आई, चाहे वह कोरोना काल का भयावह दौर हो (जहाँ उन्होंने सैकड़ों परिवारों को राशन मुहैया कराया) या कोई अन्य संकट, सेवा की पंक्ति में सबसे पहला नाम अनीता दीदी का ही होता है। उनकी इन्हीं निस्वार्थ सेवाओं के कारण जिला कलेक्टर द्वारा उन्हें सम्मानित भी किया जा चुका है।

आस्था और सामंजस्य की मिसाल
नालछा माता की परम भक्त और धार्मिक उत्सव समिति की प्रमुख के रूप में अनीता दीदी का भक्ति भाव देखते ही बनता है। नवरात्रि महोत्सव हो या भगवान पशुपतिनाथ की शाही सवारी, वे पूरी श्रद्धा के साथ प्रमुख भूमिका निभाती हैं। उन्होंने जाति-पाति के भेदभाव से ऊपर उठकर समाज को एक सूत्र में बांधने का काम किया है। इतना ही नहीं, अपने ‘चेला परिवार’ के लिए स्वयं के खर्च पर आवास बनवाकर उन्होंने एक अभिभावक होने का धर्म निभाया है।

“मातृत्व केवल जन्म देने का नाम नहीं है, मातृत्व नाम है उस दर्द का जो दूसरे की आंखों में आंसू देखकर अपने दिल में महसूस हो। अनीता दीदी ने यह साबित कर दिया कि एक माँ का दिल होने के लिए सिर्फ ममता की जरूरत होती है।”

आज पूरा क्षेत्र और विशेषकर पिपलिया मंडी अनीता दीदी के इस सेवा भाव और आशीर्वाद के लिए उनका ऋणी है। समाज के हर वर्ग के लिए वे प्रेरणा का वह दीप हैं, जिसकी लौ कभी कम नहीं होती।

— नरेश जजवानी ‘गोई’ (समाजसेवी, पिपलिया मंडी)