नीमच | ज्ञानोदय इंस्टिट्यूट ऑफ़ फार्मेसी, सुवाखेड़ा महाविद्यालय परिसर में बुधवार को पौधरोपण कार्यक्रम संपन्न हुआ| इस अवसर पर संस्था की निदेशिका डॉ. माधुरी चौरसिया ने कहा कि पौधारोपण समाज का सांस्कृतिक और सामाजिक दायित्व है। स्कूलों और कॉलेजों में वृक्षारोपण पर जोर देकर हम छात्रों में पर्यावरणीय जिम्मेदारी की भावना पैदा करते हैं। प्रकृति के महत्व के प्रति उनकी समझ और सराहना को बढ़ावा देते हैं। पर्यावरण को स्वच्छ एवं स्वस्थ बनाने के लिए वृक्षारोपण अत्यंत ही आवश्यक है। जितनी ज्यादा हरियाली होगी, उतना ही अधिक स्वच्छ एवं स्वस्थ वातावरण तैयार होगा। वहीं इनसे हमें प्राणवायु ऑक्सीजन मिलती है। कोरोनाकाल में ऑक्सीजन का महत्व किसी से छिपा नहीं है। पर्यावरण को बचाने के लिए हमें अधिक से अधिक पेड़-पौधे लगाकर उनका संरक्षण करना होगा, तभी हम अपनी आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ पर्यावरण दे सकते हैं। उक्त जानकारी ज्ञानोदय ग्रुप में मीडिया प्रभारी अनूप चौधरी ने दी। प्राचार्य डॉ. कल्पना पाटीदार ने बताया कि शिक्षा का उद्देश्य महज किताबी ज्ञान, तकनीकी शिक्षा न होकर विद्यार्थियों में सामाजिक जिम्मेदारी का भाव पैदा करना, उन्हें जिम्मेदार नागरिक बनाना भी है। कैंपस के हरा- भरा होने से विद्यार्थियों को प्रदूषणमुक्त वातावरण मिलता है, साथ ही उन्हें पढ़ाई में एकाग्रता भी मिलती हैं। महाविद्यालय परिसर में औषधीय पौधों का बगीचा पहले से है, जिसमें आज कई औषधिय पौधे जैसे कि आंवला, जामुन, नीम, गुड़हल, धृतकुमारी, सीताफल, नींबू, संतरा, चैरी, किवी, तुलसी, अश्वगंधा के अलावा गुलाब, मोगरा, चंपा भी लगाए गए। इस अवसर पर महाविद्यालय की निदेशिका डॉ. माधुरी चौरसिया, मैनेजिंग डायरेक्टर, ग्रुप डायरेक्टर डॉ. प्रशांत शर्मा, प्रिंसिपल डॉ. कल्पना पाटीदार, हायर सेकंड्री रिटायर्ड प्रिंसिपल रमेश मेहता, हरीश उपाध्याय, अमृतलाल चौहान एवं समस्त स्टाफ ने जागरूकतापूर्वक पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छ भारत का सन्देश दिया। कार्यक्रम को कोआर्डिनेट प्रो. अर्जुन परमार एवं प्रो. अनीस मंसूरी ने किया।