( मनोज मीणा )

नीमच। भारतीय जनता पार्टी के स्थापना दिवस 6 अप्रैल के मौके पर जहां पूरे प्रदेश में उत्सव का माहौल है,वहीं नीमच भाजपा में एक निमंत्रण पत्र ने सियासी हलचल तेज कर दी है। नए जिला कार्यालय के भूमिपूजन कार्यक्रम,जिसका वर्चुअल शुभारंभ मुख्यमंत्री मोहन यादव द्वारा किया जाना है, उससे पहले ही संगठन के भीतर नाराजगी खुलकर सामने आने लगी है। बताया जा रहा है कि कार्यक्रम के निमंत्रण पत्र में महत्वपूर्ण स्थानीय नेताओं के नाम शामिल नहीं किए गए हैं, जिससे कार्यकर्ताओं और समर्थकों में असंतोष फैल गया है। खास बात यह है कि जिन नेताओं की भूमिका इस कार्यालय की जमीन और योजना में अहम मानी जा रही है, वे ही इस सूची से बाहर हैं।

इनके नाम गायब,स्वाति चोपड़ा: ये शहर की प्रथम नागरिक यानी ‘नगर सत्ता की मुखिया’ हैं। इनकी ही नगर पालिका परिषद ने इस दफ्तर के लिए करोड़ों की जमीन दी थी। वे प्रदेश मीडिया पैनलिस्ट भी हैं। फिर भी कार्ड में उनका नाम नहीं है।

पवन पाटीदार: ये भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष हैं एव पिछड़ा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष भी इनके समर्थक बताते है कि इनके कार्यकाल में इस दफ्तर के लिए जमीन मिली और शुरुआत हुई। एक तरह से वे इस प्रोजेक्ट के मुख्य ‘शिल्पकार’ हैं। उन्हें भी इस न्यौते से दूर रखा गया है। इन दोनों कद्दावर नेताओं पर कैंची चलना कोई ‘सामान्य चूक’ नहीं, बल्कि एक सोची-समझी ‘सियासी सर्जिकल स्ट्राइक’ मानी जा रही है।
ढाल भोपाल की,निशाना नीमच का?
जब कार्यकर्ताओं में नाराजगी बढ़ी तो वर्तमान जिलाध्यक्ष वंदना खंडेलवाल ने सफाई दी। उन्होंने कहा,”मैंने अपनी तरफ से कुछ नहीं किया है, हाईकमान से जैसी लिस्ट आई, वैसा ही कार्ड छपा है।” राजनीतिक हलकों में इसे सामान्य चूक नहीं बल्कि एक सोची-समझी रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। नगर पालिका स्तर से लेकर संगठन के पूर्व पदाधिकारियों तक, कई नामों के गायब होने से यह सवाल उठ रहा है कि क्या स्थानीय स्तर पर गुटबाजी हावी हो रही है। इस मामले में जिला अध्यक्ष वंदना खंडेलवाल की सफाई भी सामने आई है। उनका कहना है कि निमंत्रण सूची उच्च स्तर से तय होकर आई थी और उसी के आधार पर कार्ड छपवाए गए हैं। पार्टी सूत्रों के अनुसार, प्रदेश स्तर पर एक समान गाइडलाइन के तहत कई जिलों में एक जैसे प्रारूप में निमंत्रण पत्र तैयार किए गए हैं। अब इस पूरे मामले की सच्चाई अन्य जिलों के निमंत्रण पत्रों से स्पष्ट हो सकती है। यदि अन्य जिलों में भी स्थानीय प्रमुख नेताओं के नाम शामिल नहीं हैं, तो इसे संगठन की एकरूप नीति माना जाएगा। लेकिन यदि अन्य जगहों पर ऐसे नाम शामिल पाए जाते हैं, तो नीमच में ‘कार्ड पॉलिटिक्स’ के जरिए स्थानीय स्तर पर सियासी समीकरण साधने की चर्चा और तेज हो सकती है। स्थापना दिवस के इस आयोजन से पहले उपजी यह स्थिति साफ संकेत दे रही है कि जश्न के बीच संगठन के भीतर असंतोष की लहर भी मौजूद है, जिस पर आने वाले दिनों में पार्टी नेतृत्व को ध्यान देना पड़ सकता है।