नीमच। तहसील मुख्यालय पर गांधी सागर जलाशय के बैक वाटर में संचालित होने वाले मोटर बोट स्ट्रीमर कभी भी जानलेवा साबित हो सकते हैं । क्योंकि मोटर बोर्ड संचालक नियम कायदों को ताक पर रखकर अधिक लाभ कमाने के उद्देश्य से लोगों की जान के साथ खिलवाड़ करने से भी बाज नहीं आ रहे हैं। चंबल नदी में रामपुरा चचोर सोनड़ी खड़ावदा बरामा साठखेड़ा सुवासरा शामगढ़ जाने के लिए लोग कम समय एवं कम खर्च के कारण मोटर बोट स्ट्रीमर का प्रयोग करते हैं। उक्त मोटर स्टीमर में लोगों का समय तो बचता ही है साथ ही कम किराए पर लोग अपने गंतव्य तक पहुंच जाते हैं परंतु स्ट्रीमर संचालक अपने मुनाफे को देखते हुए क्षमता से अधिक सवारिया एवम टू व्हीलर मोटर साइकल वाहनों का परिवहन भी क्षमता से अधिक कर रहे हैं। जिस पर प्रशासन के कोई रोका टोकी ना होने के कारण कभी भी किसी बड़े हादसे की घटना उभर कर सामने आ सकती हैं। इससे पूर्व में भी गांधी सागर जलाशय में संचालित होने वाली एक नाव के पलट जाने से कहीं लोग काल के ग्रास में समा गए थे साथ ही संचालित होने वाले मोटर बोट में परिवहन करने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर भी लाइक जैकेट या पूरी तरह सुरक्षा संसाधन उपलब्ध नहीं है ऐसे में गांधी सागर जलाशय में स्टीमर में यात्रा करना खतरे से खाली नहीं है परंतु मोटर बोट संचालक अपने क्षणिक लाभ के चक्कर में लोगों की जान से खेलते हुए नजर आ रहे हैं जिस पर प्रशासन के कोई रोका टोकी नहीं है । पूर्व में संचालित होने वाले स्टीमर पर जल संसाधन विभाग द्वारा एक टाइम कीपर की नियुक्ति कर रखी थी परंतु अब गांधी सागर जलाशय में संचालित होने वाली मोटर बोट परिवहन विभाग के अंतर्गत आती है। और वही परिवहन विभाग कभी भी इस ओर ध्यान नहीं देता यहां तक कि कभी भी परिवहन विभाग के किसी कबड़े अधिकारी ने आकर स्थिति को देखा तक नहीं है ऐसे में कभी कोई मे बड़ा हादसा हो जाता है तो उसका जिम्मेदार कौन होगा। संबंधित परिवहन अधिकारियों को इस विषय पर ध्यान देकर तुरंत एक्शन लेना चाहिए ।


