नीमच। नीमच क्षेत्र में वर्ष 2009 में बंशी गुर्जर फर्जी एनकाउंटर मामले में सीबीआई टीम ने  डीएसपी ग्लेडविन ओर प्रधान आरक्षक नीरज प्रधान को गिरफ्तार किया है।  नीमच के कुख्यात अपराधी और तस्कर बंशी गुर्जर को पुलिस ने एनकाउंटर में मृत बताया था, जबकि वह 2012 में उज्जैन के दानीगेट से जिंदा पकड़ा गया था। सीबीआई ने पहले दोनों पुलिसकर्मियों को बुलाया और फिर गिरफ्तार कर लिया। अब उनसे पूछताछ की जा रही है कि, इस फर्जी एनकाउंटर के पीछे किसका हाथ था और आखिर मारा गया युवक कौन था। दरअसल फर्जी एनकाउंटर से जुड़ा यह पूरा बहुचर्चित मामला साल 2009 का नीमच का है, जब पुलिस ने कथित तौर पर तस्कर बंसी गुर्जर का फर्जी एनकाउंटर कर दिया था। लेकिन इस मामले ने नया मोड़ तब ले लिया, जब 2012 में पुलिस ने बंसी गुर्जर को जिंदा गिरफ्तार कर लिया। इससे पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया, सवाल उठने लगे कि एनकाउंटर में मारा गया व्यक्ति आखिर था कौन…? इस मामले की सीबीआई जांच के लिए 2012-13 में नीमच के दो लोगों ने इंदौर हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। कोर्ट के आदेश के बाद सीबीआई ने जांच शुरू की और अब एसडीओपी ग्लैडविन कर (जो घटना के समय नीमच टीआई थे) और प्रआ. नीरज प्रधान (जो तब कॉन्स्टेबल थे) को गिरफ्तार किया गया है।

क्या यह अधिकारी भी जांच के घेरे में…!

बताया जा रहा है कि, इस मामले में कई अधिकारी जांच के घेरे में होने के साथ ही रडार में हैं। इसमें तत्कालीन एसपी वेदप्रकाश शर्मा, जो रिटायर हो गए हैं, और अभी बाबा रामदेव की कंपनी का काम देखते हैं। उनके साथ ही अनिल पाटीदार, जो अभी बड़वानी के एडिशनल एसपी है, विवेक गुप्ता, जो पीथमपुर सीएसपी है, और उस समय एसआई थे, मुख्तयार कुरैशी, एसीपी भोपाल, जो उस समय एसआई थे, इन सभी से भी पूछताछ की जा सकती है, और कहीं न कहीं ये सभी जांच के घेरे में भी हैं।

बंशी गुर्जर नीमच जिले की मनासा तहसील के गांव नलवा का रहने वाला है और कुख्यात तस्कर है। 4 फरवरी 2009 को उसने राजस्थान पुलिस पर हमला कर साथी रतनलाल मीणा को छुड़ाया था। इसके बाद 7 फरवरी को नीमच पुलिस ने उसके एनकाउंटर का दावा किया। लेकिन 20 दिसंबर 2012 को उज्जैन पुलिस ने उसे दानीगेट से जिंदा पकड़ लिया। उस समय उज्जैन में उपेंद्र जैन आईजी थे। बंशी के साथ पकड़े गए घनश्याम ने ही उसके जिंदा होने की जानकारी दी थी। इसके बाद उज्जैन के गोवर्धन पंड्या ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर सीबीआई जांच की मांग की थी।

कुख्यात तस्कर बंशी गुर्जर के फर्जी एनकाउंटर की जांच की सीबीआई कर रही है। हाईकोर्ट इंदौर खंडपीठ ने इसके आदेश दिए हैं। यह मामला गुजरात के सोहराबुद्दीन एनकाउंटर की तरह ही चर्चा में रहा था। उज्जैन के गोवर्धन पिता चंद्रनारायण पंड्या और नीमच निवासी मूलचंद खींची ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी। याचिका में कहा था कि पुलिस ने निर्दोष को मारने की साजिश रची।

बिन्दुवार देखें पूरी जानकारी- 

– यह गिरफ्तारी 2009 में हुए फर्जी एनकाउंटर केस से जुड़ी है, जिसमें पुलिस ने कथित रूप से बंसी गुर्जर को मार गिराने का दावा किया था, लेकिन 2012 में वह जिंदा मिला।

– गिरफ्तार पुलिस अधिकारी एसडीओपी एडविन कर और प्रआ. नीरज प्रधान हैं। घटना के समय एडविन कर नीमच टीआई और नीरज प्रधान, कॉन्स्टेबल थे।

– इस फर्जी एनकाउंटर की सच्चाई सामने लाने के लिए 2015-16 में हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। कोर्ट ने इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपी, जिसके बाद जांच के आधार पर यह गिरफ्तारी हुई।

– जांच में यह सामने आया कि एनकाउंटर में मारा गया व्यक्ति बंसी गुर्जर नहीं था। असली बंसी गुर्जर 2012 में पुलिस द्वारा जिंदा गिरफ्तार किया गया था। लेकिन मारे गए व्यक्ति की पहचान अभी तक नहीं हो सकी है।

– सीबीआई की टीम गिरफ्तार पुलिस अधिकारियों से पूछताछ कर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि मारे गए व्यक्ति की पहचान क्या थी और इस पूरे फर्जी एनकाउंटर में और कौन-कौन शामिल था।