नीमच। कृषि उपज मंडी नीमच में आढ़त प्रथा धड़ल्ले से चल रही है। किसानों को लूटा जा रहा है। किसानों की फसल बिकवाने के लिए ये आड़तिए दो प्रतिश्त कमीशन ले रहे हैं और ये काम मंड़ी में खुलेआम हो रहा है। खासकर नीमच की कृषि उपज मंडी चंगेरा में आढ़त प्रथा खुलेआम फल-फूल रही है, जिससे ना केवल शासन के आदेशों की अवहेलना हो रही है, बल्कि किसानों और व्यापारियों के बीच भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। ताजा मामला आज गुरूवार को चंगेरा मंडी में उस समय सामने आया जब लहसुन की एक बड़ी खेप की बोली के दौरान दो आढ़तियों के बीच तेज बहस और गाली-गलौच तक की नौबत आ गई। दोनों ही आढ़ती उस खेप को अपने माध्यम से बेचना चाहते थे। देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया कि मंडी परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार विवाद के दौरान दोनों पक्षों ने एक-दूसरे को धमकियां भी दीं,जिससे किसानों और उपस्थित व्यापारियों में भी असहजता फैल गई। जब इस बारे में मंडी प्रबंधन और संबंधित अधिकारियों से सवाल किए गए तो उनका स्पष्ट कहना था कि प्रदेश में आढ़त प्रथा पूर्णतः प्रतिबंधित है और इसका पालन किया जा रहा है। लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग तस्वीर पेश करती है। सूत्रों की मानें तो नीमच मंडी में बड़ी संख्या में व्यापारी आज भी आढ़तियों के माध्यम से ही खरीद-फरोख्त कर रहे हैं। इसके पीछे का मुख्य कारण यह है कि व्यापारी वर्ग को आढ़त व्यवस्था के जरिए 1 प्रतिशत तक का अतिरिक्त लाभ मिल जाता है, जो सीधा लेनदेन करने की स्थिति में संभव नहीं होता। किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए प्रदेश सरकार ने मंडियों को बिचौलियों और दलालों से मुक्त करने के उद्देश्य से आढ़त प्रथा को बंद किया था। परंतु नीमच मंडी में प्रशासन की अनदेखी और मिलीभगत के चलते यह व्यवस्था आज भी उसी तरह संचालित हो रही है, जैसे पहले हुआ करती थी। अब बड़ा सवाल यह उठता है कि जब शासन स्तर पर आढ़त पर रोक है, तो नीमच मंडी में यह क्यों और कैसे चालू है? क्या जिम्मेदार अधिकारी इस पर कार्रवाई करेंगे या यह व्यवस्था यूं ही चलती रहेगी?

साल 1992 से बंद है आढ़त प्रथा

किसानों को उनकी फसल का पूरा दाम मिले, इसे लेकर ही सरकार ने करीब 32 साल पहले, साल 1992 में आढ़त प्रथा पर रोक लगाई थी और मंडियों में नई व्यवस्था लागू की थी

आढ़तिए किसानों से ले रहे 1 से 2 प्रतिशत कमीशन इस सब के बावजूद नीमच कृषि उपज मंडी में आढ़तियों का दबदबा है। किसानों के मंडी में फसल लाते ही वे उन्हें घेर लेते हैं और मोल-तोल का भाव शुरू कर देते हैं। किसानों को बरगला कर उनकी फसल को जल्द बिकवाने के लिए 2 प्रतिशत का कमीशन खुलेआम ले रहे हैं। दूर दराज से आने वाले किसान मजबूरी में आढ़तियों के द्वारा फसल बेचने को मजबूर हैं