नीमच। जिले में यात्रियों की सुरक्षा को ताक पर रखकर लग्जरी बसों का उपयोग खुलेआम ‘मालगाड़ी’ की तरह किए जाने का मामला सामने आया है। प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए ‘अशोक ट्रेवल्स’ की एक बस को जब्त किया, जिसमें क्षमता से अधिक भारी मात्रा में व्यावसायिक माल लदा हुआ था। बस की छत पर ठूंसे गए सामान ने न केवल यातायात नियमों की धज्जियां उड़ाईं, बल्कि यात्रियों की जान भी खतरे में डाल दी। जानकारी के अनुसार, कार्रवाई के दौरान बस संचालकों द्वारा अपने प्रभाव और रसूख का इस्तेमाल कर मामले को दबाने की कोशिश भी की गई। सूत्रों के मुताबिक कई जगह फोन घुमाए गए, लेकिन मौके पर मौजूद अधिकारियों ने सख्ती दिखाते हुए बस को जब्त कर लिया।

सिर्फ एक बस पर कार्रवाई, बाकी पर चुप्पी क्यों?
अशोक ट्रेवल्स पर हुई कार्रवाई के बाद अब प्रशासन की निष्पक्षता पर सवाल उठने लगे हैं। शहर में संचालित कई अन्य ट्रेवल एजेंसियों पर भी लंबे समय से लग्जरी बसों में अवैध रूप से माल ढुलाई करने के आरोप लगते रहे हैं, लेकिन उन पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अजय ट्रेवल्स, गायत्री ट्रेवल्स, मुल्तानी सोना और कोठानी जैसी कई बसें भी खुलेआम ओवरलोडिंग कर रही हैं, लेकिन प्रशासन की नजरें उन तक नहीं पहुंच रही हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या कार्रवाई सिर्फ दिखावे और खानापूर्ति तक सीमित है?
यात्रियों की सुरक्षा पर बड़ा खतरा
विशेषज्ञों के अनुसार, लग्जरी बसों की छत पर अत्यधिक वजन लादना हादसों को न्योता देने जैसा है। इससे बस का संतुलन बिगड़ सकता है और तेज रफ्तार या मोड़ पर बड़ा हादसा हो सकता है। इसके बावजूद नियमों की अनदेखी लगातार जारी है।
प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल
इस पूरे मामले ने प्रशासन की मंशा और कार्यप्रणाली को लेकर बहस छेड़ दी है। यदि नियम सभी के लिए समान हैं, तो फिर अन्य बस ऑपरेटरों पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही? क्या प्रभावशाली ट्रांसपोर्टरों को संरक्षण दिया जा रहा है, या फिर मामला केवल ‘सेटिंग’ और ‘मंथली सिस्टम’ तक सीमित है?
अब देखना होगा कि सोशल मीडिया और जनचर्चा में मामला गर्माने के बाद प्रशासन अन्य बस ऑपरेटरों पर भी कार्रवाई करता है या फिर यह पूरा मामला सिर्फ एक बस की जब्ती तक सीमित रह जाएगा।