महावीर सिंह चंद्रावत
नीमच। गांव की गलियां आज सुन रह गई। हर एक के आंख में आज आंसुओं का सैलाब देखने को मिला। घटन इतनी गमगीन है आसपास के गांव में भी चौराहे पर चर्चा बन गई है। जिससे पूछो उसके मुख से बस यही शब्द निकला कि भगवान इस प्रकार का क्रियाकलाप तो दुश्मन के साथ भी नहीं करे, जी हां एक घर का दिया बुज गया तो उसी घर को आने वाले भविष्य में रोशनी से भरने वाला सूरज भी डूब गया। इस परिवार का मानो सब कुछ खत्म हो गया है। घटना है शुक्रवार शाम 4 बजे की। कुकडेश्वर थाना क्षेत्र के ग्राम सेमली आंतरी निवासी दशरथ सिंह पिता ईश्वर सिंह चंद्रावत 40 वर्ष ओर इनका ही पुत्र पवन उर्फ लखन सिंह पिता दशरथ सिंह चंद्रावत 20 वर्ष खेत पर खरबूजे का कार्य करने पहुंचे थे, काम निपटाकर गंतव्य को लौटना था लेकिन दिन भर की तेज गर्मी में कार्य करने के कारण दोनों ने नदी में नहाने का निर्णय लिया। जब नदी पर पहुंचे और पिता दशरथ अपने कपड़े उतारे उससे पहले उनके पुत्र अपने कपड़े उतारकर नदी में कूद गया बिना पानी की गहराई जाने बेटे को डूबता देख पिता ने बिना कपड़े उतारे ही पानी में छलांग लगा दी लेकिन तेज हवा के कारण नदी में चलते हिलोरों ने दोनों पिता पुत्र को अपनी चपेट में ले लिया और दोनों ही नदी के अंदर चले गए। सूचना मिलने पर कुकडेश्वर थाना प्रभारी भीम सिंह सिसोदिया मय पुलिसबल के घटना स्थल पर पहुंचे और एस डी आर एफ को सूचना दी तो 5 सदस्यीय टीम मौके पर पहुंचे और रेस्क्यू किया तो पिता का शव बाहर निकाल पंचनामा बनाकर 108 की सहायता से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मनासा भिजवाया वही रेस्क्यू टीम के अथक प्रयासों के बाद भी पुत्र पवन का शव देर तक नहीं मिलने से रेस्क्यू को अस्थाई रूप से रोक दिया जो शनिवार सुबह पुनः 8 बजे चलाया। दिन भर रेस्क्यू टीम द्वारा काफी वृहद स्तर से प्रयास किए गए लेकिन फिर भी टीम को शाम देर खाली हाथ ही लौटना पड़ा लेकिन रविवार सुबह पवन का शव स्वयं ही ऊपर आ गया जिसकी सूचना मिलने पर पूरा गांव घटना स्थल पर पहुंचने के लिए दौड़ पड़ा, बाद इसके सूचना पर 108 ओर कुकडेश्वर थाना पुलिस मौके पर पहुंची जहां पंचनामा बनाकर शव को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मनासा भेजा जहां दोनों पिता – पुत्र का शव परीक्षण कर परिजनों के सुपुर्द कर दिया। जिसके बाद घर लाने पर परिजनों सहित गांव में शोक की लहर दौड़ गई पिता – पुत्र की अर्थी एक साथ चिता पर लेती तो दाह संस्कार में पहुंचे दागिए भी रोने लग गए। यू मानो कि पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई।
पिता कृषक तो पुत्र कॉलेज में पढ़ाई कर रहा था, परिवार में इकलौता बेटा था पवन एक छोटी बहन भी है। जानकारी देते हुए बता दे कि पिता शुरू से ही कृषि कार्य करते थे। तो पुत्र कॉलेज में सेकंड ईयर में पढ़ाई कर रहा था। काफी होनहार छात्र था। पवन के एक छोटी बहन है जो पढ़ाई कर रही है अभी। दोनों भाई – बहन अविवाहित है। पवन के कोई दूसरा भाई नहीं है तो दशरथ सिंह के भी कोई भाई नहीं था। अब घर में केवल दशरथ सिंह के पिता ईश्वर सिंह मौजूद है। जिन्होंने घर की जवाब दारी पहले ही अपने बेटे दशरथ सिंह को सौंप दी थी। लेकिन पुनः अब उन्हें अब घर की जिम्मेदारी अपने सर पर लेना पड़ेगी।


