नीमच/नेवड़। जिले के नेवड़ स्थित SR कॉलेज एक बार फिर विवादों और सवालों के घेरे में है। इस बार मामला LLB, BA LLB, B.Sc Microbiology, B.Sc Plain, B.Sc Biotechnology, B.Com Plain, B.Com Computer और BA जैसे पाठ्यक्रमों से जुड़ा है। आरोप है कि जिन कोर्सों को न तो शासन से मान्यता मिली और न ही उनके आवेदन स्वीकृत हुए,उन्हीं पाठ्यक्रमों के लिए कॉलेज द्वारा एडमिशन-रजिस्ट्रेशन, प्रचार-प्रसार और अब लिखित आश्वासन तक दिया जा रहा है। सबसे गंभीर बात यह बताई जा रही है कि कॉलेज के विज्ञापनों और प्रचार सामग्री में जिन कोर्सों को प्रमुखता से दिखाया जा रहा है,उनमें से कई कोर्सों के आवेदन शासन द्वारा खारिज किए जा चुके हैं,फिर भी छात्रों को प्रवेश का भरोसा दिया जा रहा है। शहर और आसपास के गांवों में बड़े-बड़े बोर्ड-बैनर लगाकर छात्रों को आकर्षित किए जाने की बात सामने आ रही है, जिससे विद्यार्थियों और अभिभावकों के गुमराह होने की आशंका गहरा गई है। जानकारी के अनुसार SR कॉलेज नेवड़ ने LLB,BA LLB,B.Sc Microbiology, B.Sc Plain,B.Sc Biotechnology, B.Com Plain,B.Com Computer और BA पाठ्यक्रमों के संचालन के लिए शासन में आवेदन प्रस्तुत किए थे। शासन स्तर पर परीक्षण के दौरान इन आवेदनों में गंभीर कमियां पाई गईं,जिसके चलते संबंधित पाठ्यक्रमों के आवेदन खारिज कर दिए गए। इसके बाद भी कॉलेज प्रबंधन द्वारा छात्रों के रजिस्ट्रेशन, एडमिशन संबंधी संपर्क और प्रचार-प्रसार किए जाने की चर्चा है। स्थानीय स्तर पर यह भी कहा जा रहा है कि जिन कोर्सों का प्रचार विज्ञापनों में प्रमुखता से किया जा रहा है, उनमें से कई के आवेदन शासन द्वारा पहले ही खारिज किए जा चुके हैं।
अब लिखित में भी दे रहा भरोसा, ‘आपके प्रवेश की जिम्मेदारी महाविद्यालय लेता है’,मामले को और गंभीर बनाता है कॉलेज द्वारा छात्रों को दिया जा रहा लिखित आश्वासन। सामने आए एक दस्तावेज़ में कॉलेज की ओर से यह लिखा गया है कि “सत्र 2026-27 में कक्षा 12वीं पास आप सभी छात्रों द्वारा प्रवेश हेतु हमारे महाविद्यालय में प्री रजिस्ट्रेशन किया गया है। महाविद्यालय द्वारा आपके साथ ऐसा कोई भी कदम नहीं उठाया जाएगा जिससे आपका भविष्य/वर्ष खराब हो या सत्र 2026-27 में प्रवेश लेने से वंचित हों। महाविद्यालय आपके प्रवेश की जिम्मेदारी लेता है।” दस्तावेज़ पर कॉलेज की ऑफिस स्टाम्प भी दिखाई दे रही है और उसमें BA LLB, LLB, BCA जैसे कोर्सों का उल्लेख भी हाथ से लिखा हुआ नजर आ रहा है। ऐसे में सवाल यह खड़ा हो रहा है कि जब संबंधित पाठ्यक्रमों की मान्यता/स्वीकृति की स्थिति स्पष्ट नहीं है और कई कोर्सों के आवेदन खारिज हो चुके हैं, तो कॉलेज किस आधार पर छात्रों को लिखित रूप से प्रवेश की जिम्मेदारी लेने का भरोसा दे रहा है?
खारिज कोर्सों के लिए भी ‘एडमिशन ओपन’ का माहौल?
मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब संबंधित कोर्सों को शासन की स्वीकृति नहीं मिली और उनके आवेदन भी खारिज हो गए,तो फिर कॉलेज किस आधार पर इन पाठ्यक्रमों के लिए एडमिशन-रजिस्ट्रेशन कर रहा है? स्थानीय लोगों का आरोप है कि कॉलेज प्रबंधन शहर और गांवों में बोर्ड,बैनर और प्रचार सामग्री के जरिए ऐसा माहौल बना रहा है, मानो इन कोर्सों में प्रवेश प्रक्रिया सामान्य रूप से चल रही हो। इससे छात्र और अभिभावक यह मान सकते हैं कि संबंधित पाठ्यक्रमों को वैधानिक स्वीकृति मिल चुकी है, जबकि वास्तविक स्थिति इससे अलग बताई जा रही है।
शिक्षा जगत से जुड़े लोगों का कहना है कि बिना मान्यता और स्वीकृति वाले कोर्सों में प्रवेश लेना या दिलाना छात्रों के लिए आगे चलकर गंभीर समस्या बन सकता है। ऐसे मामलों में रजिस्ट्रेशन, परीक्षा, डिग्री, छात्रवृत्ति, उच्च शिक्षा और रोजगार तक प्रभावित हो सकते हैं। यही वजह है कि कॉलेज की इस कार्यप्रणाली को लेकर अब स्थानीय स्तर पर नाराजगी और चिंता दोनों बढ़ती जा रही हैं।
विज्ञापन में जिन कोर्सों का प्रचार,उनमें कई के आवेदन खारिज,स्थानीय सूत्रों का कहना है कि कॉलेज के बोर्ड-बैनर और प्रचार सामग्री में जिन कोर्सों को प्रमुखता से दिखाया जा रहा है, उनमें से कई पाठ्यक्रमों के आवेदन शासन द्वारा खारिज किए जा चुके हैं। ऐसे में यह सवाल और गंभीर हो जाता है कि क्या छात्रों और अभिभावकों को यह स्पष्ट रूप से बताया जा रहा है कि संबंधित कोर्सों की वास्तविक स्थिति क्या है? यदि विज्ञापन में बड़े स्तर पर उन्हीं कोर्सों का प्रचार हो रहा है जिनके आवेदन खारिज हो चुके हैं, तो यह सीधे तौर पर छात्रों को भ्रमित करने वाली स्थिति पैदा करता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई छात्र और अभिभावक केवल कॉलेज के प्रचार, बोर्ड-बैनर और मौखिक भरोसे के आधार पर रजिस्ट्रेशन करा रहे हैं। यदि बाद में इन पाठ्यक्रमों की वैधता पर सवाल खड़े होते हैं, तो सबसे बड़ा नुकसान सीधे छात्रों को उठाना पड़ सकता है। यही कारण है कि अब यह मामला सिर्फ एक कॉलेज के प्रचार-प्रसार तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि इसे छात्रों के भविष्य से जुड़े गंभीर मुद्दे के रूप में देखा जा रहा है।
B.Pharma और D.Pharma को लेकर भी उठ चुके हैं सवाल,यह पहला मौका नहीं है जब SR कॉलेज नेवड़ का नाम मान्यता और प्रचार-प्रसार को लेकर चर्चा में आया हो। इससे पहले भी कॉलेज B.Pharma और D.Pharma पाठ्यक्रमों के संदर्भ में विवादों में रहा था। उस समय भी कॉलेज के विज्ञापन और प्रचार-प्रसार को लेकर सवाल उठे थे और इस संबंध में समाचार प्रकाशित हुआ था। अब नए पाठ्यक्रमों के मामले में फिर उसी तरह की गतिविधियों की चर्चा ने कॉलेज की कार्यशैली पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
‘मान्यता के बिना एडमिशन लेना बिल्कुल गलत’ — डॉ. प्रशांत मिश्रा,इस पूरे मामले को लेकर स्वामी विवेकानंद पीजी कॉलेज,नीमच के प्राचार्य डॉ. प्रशांत मिश्रा से भी चर्चा की गई। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जब तक किसी कॉलेज या किसी पाठ्यक्रम को शासन से मान्यता नहीं मिलती, तब तक उसमें एडमिशन लेना बिल्कुल गलत है। उन्होंने कहा कि इस तरह की प्रक्रिया छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। डॉ. मिश्रा ने यह भी कहा कि विद्यार्थियों और अभिभावकों को किसी भी कॉलेज में प्रवेश लेने से पहले संबंधित कोर्स की मान्यता, संबद्धता और शासन की स्वीकृति की आधिकारिक जानकारी अवश्य प्राप्त कर लेनी चाहिए।

छात्रों के भविष्य पर मंडराता खतरा,मामले में सबसे गंभीर बात यह है कि यदि किसी पाठ्यक्रम को शासन की स्वीकृति नहीं मिली और उसका आवेदन भी खारिज हो गया, तो उस कोर्स में प्रवेश लेने वाले छात्रों का भविष्य अधर में पड़ सकता है। ऐसे विद्यार्थियों को बाद में यह सवाल झेलना पड़ सकता है कि उनके कोर्स की वैधता क्या है, परीक्षा कैसे होगी, डिग्री मान्य होगी या नहीं, और आगे नौकरी या उच्च शिक्षा में उस डिग्री का क्या महत्व रहेगा। यही वजह है कि इस पूरे मामले को केवल एक प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ के रूप में भी देखा जा रहा है।
420 का केस दर्ज कर कॉलेज सील करने की मांग,मामले ने अब स्थानीय स्तर पर गंभीर रूप ले लिया है। कई जागरूक नागरिकों, अभिभावकों और शिक्षा से जुड़े लोगों ने मांग उठाई है कि यदि जांच में यह सामने आता है कि कॉलेज ने बिना स्वीकृति/खारिज आवेदनों वाले कोर्सों में छात्रों को गुमराह कर रजिस्ट्रेशन या प्रवेश दिलाने की कोशिश की है, तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ धोखाधड़ी के प्रकरण दर्ज किए जाएं। कुछ लोगों ने आईपीसी की धारा 420 के तहत मामला दर्ज करने और कॉलेज की गतिविधियों की उच्चस्तरीय जांच कर कॉलेज को सील करने की मांग भी उठाई है। लोगों का कहना है कि यदि किसी शैक्षणिक संस्थान द्वारा ऐसे कोर्सों का प्रचार किया जाता है, जिनकी वैधानिक स्थिति स्पष्ट नहीं है या जिनके आवेदन खारिज हो चुके हैं,और फिर छात्रों से रजिस्ट्रेशन कराया जाता है, तो यह सिर्फ नियमों की अनदेखी नहीं, बल्कि छात्रों और अभिभावकों के साथ गंभीर छल के रूप में देखा जाना चाहिए
जांच और कार्रवाई की मांग तेज,अब स्थानीय स्तर पर इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग उठने लगी है। शिक्षाविदों और जागरूक नागरिकों का कहना है कि यदि कॉलेज वास्तव में उन कोर्सों के लिए छात्रों का रजिस्ट्रेशन कर रहा है, जिनके आवेदन शासन ने खारिज कर दिए हैं, तो यह गंभीर मामला है और उच्च शिक्षा विभाग को तत्काल स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। साथ ही यह भी मांग की जा रही है कि कॉलेज सार्वजनिक रूप से यह बताए कि वर्तमान में किन-किन पाठ्यक्रमों को मान्यता प्राप्त है और किनकी आवेदन प्रक्रिया खारिज हो चुकी है।
छात्रों और अभिभावकों से अपील,शिक्षा विशेषज्ञों ने छात्रों और अभिभावकों से अपील की है कि वे केवल बोर्ड, बैनर, विज्ञापन या मौखिक आश्वासन के आधार पर किसी भी कोर्स में प्रवेश न लें। प्रवेश लेने से पहले संबंधित कॉलेज की मान्यता, संबद्ध विश्वविद्यालय, शासन की स्वीकृति और आधिकारिक दस्तावेज अवश्य जांच लें, ताकि बाद में किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।