राकेश मीणा, वरिष्ठ पत्रकार

कोटा। कभी आदिवासी और वंचित वर्ग के विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा प्राप्त करना एक बड़ी चुनौती माना जाता था, लेकिन आज राजस्थान की धरती पर स्थापित देश की पहली निजी जय मीनेश आदिवासी यूनिवर्सिटी हजारों युवाओं के सपनों को नई उड़ान दे रही है। यह विश्वविद्यालय केवल एक शैक्षणिक संस्थान नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन और शिक्षा के माध्यम से सशक्तिकरण का एक बड़ा अभियान बन चुका है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि के पीछे अखिल भारतीय श्री मीना सामाजिक एवं शैक्षणिक समिति, कोटा की दो दशक लंबी संघर्षपूर्ण यात्रा रही है। पूर्व आईपीएस अधिकारी एवं वर्तमान बस्सी विधायक लक्ष्मण मीणा की प्रेरणा और दूरदर्शी सोच के साथ समिति की स्थापना हुई थी। उद्देश्य स्पष्ट था— समाज के प्रतिभावान लेकिन संसाधनों से वंचित विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना और उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा के योग्य बनाना।आज उसी संकल्प का परिणाम है कि कोटा के रानपुर क्षेत्र में स्थापित जय मीनेश आदिवासी यूनिवर्सिटी देश की पहली निजी आदिवासी यूनिवर्सिटी के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान बना चुकी है। सितंबर 2025 में इसका लोकार्पण हुआ और अल्प समय में ही इस विश्वविद्यालय ने शिक्षा जगत में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। विश्वविद्यालय के चेयरपर्सन एवं पूर्व आरएएस अधिकारी आर.डी. मीणा ने बताया कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य केवल डिग्री प्रदान करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को आधुनिक, तकनीकी, रोजगारोन्मुख और मूल्य आधारित शिक्षा उपलब्ध कराना है। यहां शिक्षा के साथ कौशल विकास, अनुसंधान और व्यक्तित्व निर्माण पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति से लेकर विभिन्न राज्यों के जनप्रतिनिधियों, शिक्षाविदों और सामाजिक संगठनों तक ने इस अनूठी पहल की सराहना की है। यह विश्वविद्यालय आज आदिवासी समाज ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए गौरव का विषय बन चुका है।

छात्रावासों ने हजारों बेटियों को दी शिक्षा की नई राह,समिति ने शिक्षा के क्षेत्र में केवल विश्वविद्यालय की स्थापना तक स्वयं को सीमित नहीं रखा। बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कोटा में बालिका छात्रावास तथा जयपुर के प्रताप नगर में छात्रावास का संचालन किया जा रहा है। इन छात्रावासों के माध्यम से ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों की हजारों छात्राओं को सुरक्षित वातावरण में शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिला है।

समिति द्वारा संचालित छात्रवृत्ति योजनाएं, प्रतिभा सम्मान समारोह, कैरियर मार्गदर्शन शिविर और सामाजिक जागरूकता कार्यक्रम भी विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

समाज के लिए बना आधुनिक सामुदायिक भवन,समिति ने सामाजिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए कोटा शहर में 27 कमरों वाला आधुनिक एयर कंडीशनर मीना सामुदायिक भवन एवं गेस्ट हाउस भी विकसित किया है। यहां समाज के लोगों को ठहरने के लिए विशेष रियायत प्रदान की जाती है। समाज के सदस्यों को निर्धारित शुल्क में 50 प्रतिशत तक की छूट दी जाती है, जिससे यह भवन सामाजिक एकजुटता का प्रमुख केंद्र बन गया है।

अब स्वास्थ्य क्षेत्र में भी बड़ा कदम,शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलता के बाद समिति अब स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की दिशा में भी महत्वपूर्ण पहल करने जा रही है। जय मीनेश आदिवासी यूनिवर्सिटी परिसर में 100 बेड के अत्याधुनिक अस्पताल का निर्माण प्रस्तावित है। आर.डी. मीणा के अनुसार अस्पताल में आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, जिससे विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों, कर्मचारियों तथा आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी। यह अस्पताल शिक्षा और चिकित्सा के समन्वित मॉडल के रूप में विकसित किया जाएगा।

समाज सेवा का राष्ट्रीय मॉडल बन रही संस्था,विशेषज्ञों का मानना है कि अखिल भारतीय श्री मीना सामाजिक एवं शैक्षणिक समिति ने जिस प्रकार शिक्षा, छात्रावास, छात्रवृत्ति, सामाजिक भवन और अब स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में कार्य किया है, वह अन्य सामाजिक संगठनों के लिए भी प्रेरणास्रोत है। पूर्व आईपीएस अधिकारी लक्ष्मण मीणा द्वारा बोया गया शिक्षा का बीज आज एक विशाल वटवृक्ष का रूप ले चुका है। वहीं पूर्व आरएएस अधिकारी आर.डी. मीणा के नेतृत्व में संस्था लगातार नए आयाम स्थापित कर रही है। देश की पहली निजी जय मीनेश आदिवासी यूनिवर्सिटी आज केवल एक विश्वविद्यालय नहीं, बल्कि सामाजिक जागरण, शिक्षा क्रांति और आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करने वाला एक आंदोलन बन चुकी है। आने वाले वर्षों में प्रस्तावित अस्पताल, अनुसंधान केंद्र और नई शैक्षणिक परियोजनाएं इस संस्थान को राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक प्रतिष्ठित बनाएंगी।”जो समाज अपनी संतानों की शिक्षा और स्वास्थ्य पर निवेश करता है, वही समाज आने वाले समय में नेतृत्व करता है। आइए, हम सब मिलकर शिक्षा, संस्कार और सेवा के इस महायज्ञ में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें।”