नीमच। सफलता की कहानियां अक्सर बड़े संसाधनों से नहीं,बल्कि बड़े इरादों से लिखी जाती हैं। नीमच जिले के हनुमंतिया गांव के 26 वर्षीय युवा किसान कमल रावत ने इसे साबित कर दिखाया है। बीए की पढ़ाई के दौरान सिर्फ एक गाय और एक भैंस से डेयरी व्यवसाय शुरू करने वाले कमल आज एक सफल डेयरी उद्यमी बन चुके हैं। सात वर्षों की मेहनत से उन्होंने न केवल अपना व्यवसाय खड़ा किया, बल्कि करीब 30 लाख रुपए की आय अर्जित कर ग्रामीण युवाओं के लिए प्रेरणा बन गए हैं।
डेयरी पर काम करते-करते आया अपना व्यवसाय शुरू करने का विचार,कमल बताते हैं कि शुरुआत में वे एक दूध डेयरी पर काम करते थे। वहीं उन्होंने महसूस किया कि यदि यही मेहनत अपने व्यवसाय में लगाई जाए तो बेहतर परिणाम मिल सकते हैं। इसी सोच के साथ उन्होंने सीमित संसाधनों में डेयरी फार्म शुरू किया। हालांकि शुरुआत आसान नहीं थी। परिवार के कुछ सदस्यों ने इस फैसले का विरोध भी किया, लेकिन कमल अपने लक्ष्य पर डटे रहे। धीरे-धीरे व्यवसाय बढ़ा और परिणाम सामने आने लगे तो परिवार का भरोसा भी मजबूत होता गया। आज पूरा परिवार डेयरी संचालन में उनका सहयोग कर रहा है।
बिना ऋण और सरकारी मदद के खड़ा किया कारोबार
कमल की सफलता की सबसे बड़ी खासियत यह है कि उन्होंने डेयरी व्यवसाय के विस्तार के लिए न तो कोई बैंक ऋण लिया और न ही किसी सरकारी योजना का लाभ उठाया। अपनी कमाई को ही व्यवसाय में पुनर्निवेश कर उन्होंने धीरे-धीरे डेयरी को बढ़ाया। आज उनके फार्म पर 11 गायें, 5 भैंसें और कई बछिया हैं। प्रतिदिन करीब 1.20 क्विंटल दूध उत्पादन हो रहा है, जिससे नियमित आय का मजबूत स्रोत तैयार हुआ है।
दूध नहीं,मूल्यवर्धित उत्पादों ने बढ़ाया मुनाफा
कमल ने सिर्फ दूध बेचने तक खुद को सीमित नहीं रखा। उन्होंने दूध से बनने वाले घी, मावा, दही, छाछ और अन्य उत्पादों की बिक्री शुरू की। शुद्धता और गुणवत्ता के कारण गांव और आसपास के क्षेत्रों में उनके उत्पादों की मांग लगातार बढ़ी। करीब 14 लाख रुपए का निवेश कर विकसित किए गए इस व्यवसाय से उन्होंने सात वर्षों में लगभग 30 लाख रुपए की आय अर्जित की है।
गोबर से भी कमाई, जैविक खेती को मिला बढ़ावा
डेयरी व्यवसाय के साथ कमल ने गोबर का उपयोग जैविक खाद तैयार करने में किया। इससे खेती की लागत घटी और अतिरिक्त आय का स्रोत भी बना। वर्ष 2025-26 में गोबर आधारित जैविक खाद से ही उन्होंने लगभग 1.60 लाख रुपए की अतिरिक्त आय प्राप्त की।
करीब 2.5 बीघा क्षेत्र में विकसित उनके फार्म पर पशु शेड, भूसा भंडारण, बाड़ा और हरे चारे की समुचित व्यवस्था की गई है।
युवाओं के लिए मिसाल
कमल रावत की कहानी बताती है कि यदि लगन, धैर्य और निरंतर मेहनत हो तो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़ा मुकाम हासिल किया जा सकता है। एक गाय और एक भैंस से शुरू हुआ सफर आज एक सफल डेयरी मॉडल में बदल चुका है, जो ग्रामीण युवाओं को स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता की नई राह दिखा रहा है।