नीमच। अफीम नीति 2026-27 के निर्माण को लेकर सोमवार को नीमच के मंगलम रिसोर्ट में अफीम उत्पादक किसानों, जनप्रतिनिधियों और नारकोटिक्स विभाग के अधिकारियों के बीच महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई। बैठक में किसानों से सीधे सुझाव लेकर नई नीति के मसौदे में शामिल करने पर चर्चा की गई। किसानों के सुझाव अब केंद्र सरकार को भेजे जाएंगे।
बैठक में क्षेत्रीय सांसद सुधीर गुप्ता, राज्यसभा सांसद बंशीलाल गुर्जर तथा नारकोटिक्स उपायुक्त निखिल गांधी सहित बड़ी संख्या में अफीम उत्पादक किसान उपस्थित रहे। किसानों ने अफीम खेती से जुड़ी विभिन्न समस्याओं और मांगों को विस्तार से रखा।
बैठक में किसानों ने मांग की कि अफीम पट्टाधारी की मृत्यु होने पर पट्टे का नामांतरण प्राथमिकता के आधार पर उसकी पत्नी अथवा माता के नाम किया जाए, जिससे परिवार की आजीविका प्रभावित न हो। इस प्रस्ताव को नीति में शामिल करने पर विचार किया गया।
सांसद सुधीर गुप्ता ने बताया कि मॉर्फिन परीक्षण प्रक्रिया में अब अत्याधुनिक ‘कलर मैचिंग लाइब्रेरी’ तकनीक का उपयोग किया जा रहा है, जिससे जांच प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और वैज्ञानिक बनी है। उन्होंने कहा कि पहले परीक्षण संबंधी विसंगतियों के कारण हर वर्ष बड़ी संख्या में पट्टे कट जाते थे, लेकिन नई व्यवस्था लागू होने के बाद किसानों को राहत मिली है और विवादों में कमी आई है।
बैठक में किसानों ने ओलावृष्टि और प्राकृतिक आपदाओं से फसल नुकसान पर उचित मुआवजा देने की मांग भी उठाई। साथ ही लंबे समय से चली आ रही डोडाचूरा को एनडीपीएस एक्ट के दायरे से बाहर रखने की मांग को भी मजबूती से रखा गया।
जनप्रतिनिधियों ने किसानों को आश्वस्त किया कि उनकी समस्याओं और सुझावों को गंभीरता से केंद्र सरकार के समक्ष रखा जाएगा, ताकि नई अफीम नीति किसानों के हितों के अनुरूप बनाई जा सके। बैठक में क्षेत्र के अनेक किसान प्रतिनिधियों ने भाग लेकर अपने सुझाव प्रस्तुत किए।