मनासा/नीमच: इश्क में अंधी एक पत्नी ने न केवल अपने सात जन्मों के साथी का गला रेता, बल्कि कानून की चौखट पर भी उसका गुनाह नहीं छिप सका। मनासा के द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश श्री आशुतोष यादव ने पत्नी ममता बंजारा को अपने ही पति की हत्या का दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास और 2,000 रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। वो मंजर जब चीखों के बदले सन्नाटा मिला, तारीख थी 22 सितंबर 2020। ग्राम आमद (तहसील मनासा) में दोपहर के 11 से 12 बज रहे थे। घर के बाकी सदस्य मजदूरी पर गए हुए थे। 25 वर्षीय ममता का पति, तूफान बंजारा, घर में बेखबर सो रहा था। उसे अंदाजा भी नहीं था कि जिसे वह अपनी जीवनसंगिनी मानकर लाया था, वह हाथ में मौत का सामान लिए उसके सिरहाने खड़ी है। ममता ने पहले एक भारी लोहे के हथौड़े से तूफान के सिर पर वार किया। जब तूफान अचेत हो गया, तब ममता ने क्रूरता की सारी हदें पार करते हुए धारदार छुरे से उसका गला रेत दिया। पुलिस विवेचना के अनुसार, यह मर्डर कोई अचानक हुआ हादसा नहीं बल्कि एक सोची-समझी साजिश थी। ममता का पहले भी एक विवाह हुआ था, जिसे छोड़कर वह अपने मायके ढंढेरी आ गई थी। ममता का गांव के ही एक शख्स के साथ पिछले 7-8 वर्षों से प्रेम संबंध था। वह उसी के साथ रहना चाहती थी, लेकिन परिवार ने उसकी मर्जी के खिलाफ उसका ‘नातरा विवाह’ तूफान बंजारा से कर दिया। शादी के बाद भी ममता अपने प्रेमी के संपर्क में थी। कॉल रिकॉर्ड्स ने गवाही दी कि वह तूफान को अपने रास्ते से हटाकर अपने प्रेमी के पास जाना चाहती थी। इस अंधे कत्ल की गुत्थी सुलझाना पुलिस के लिए चुनौती थी, लेकिन निरीक्षक कैलाश चंद्र चौहान और एसआई निलेश सौलंकी ने बारीकी से साक्ष्य जुटाए। मनासा न्यायालय में अपर लोक अभियोजक गुलाबसिंह चंद्रावत ने दलील दी कि यह अपराध बेहद गंभीर और क्रूरतम श्रेणी का है। गवाहों के बयानों और कॉल रिकॉर्ड्स के जरिए अभियोजन ने साबित किया कि ममता ने ही इस जघन्य वारदात को अंजाम दिया है। न्यायालय ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए ममता को धारा 302 (IPC) के तहत दोषी माना और उसे ताउम्र सलाखों के पीछे रहने का हुक्म सुनाया।”कानून के हाथ लंबे होते हैं” – यह कहावत एक बार फिर सच साबित हुई। ममता ने जिस प्रेमी के लिए अपना घर उजाड़ा, आज उसी धोखे और अपराध की वजह से वह जेल की चारदीवारी में अपनी जिंदगी काटेगी।


