नीमच। एमपी बोर्ड से जुड़े पहली से आठवीं तक के निजी स्कूलों को आरटीई (राइट टू एजुकेशन) एक्ट के तहत मान्यता के लिए शिक्षा विभाग को आवेदन करने में अब मोबाइल नेटवर्क की समस्या नहीं होगी। जहां स्कूल है यदि वहां नेटवर्क नहीं है तो आसपास के क्षेत्र में जहां नेटवर्क है वहां जाकर फोटो अपलोड किया जा सकता है। अब तक यह बड़ी समस्या हो रही थी कि आखिर जहां नेटवर्क नहीं है वहां जिओ टैग से फोटो कैसे अपलोड किया जा सके। निजी स्कूल संचालकों की शिकायतों के बाद आखिरकार राज्य शिक्षा केंद्र ने प्रक्रिया में संशोधन किया है। नई मान्यता लेने या नवीनीकरण करवाने के लिए 23 जनवरी तक आवेदन करना है। इसके बाद बीआरसी द्वारा स्कूल की भौतिक सत्यापन और निरीक्षण रिपोर्ट (डीपीसी को भेजी जाएगी। यह सत्यापन तीन स्तर पर किया जाएगा। स्कूल गलत जानकारी देगा या समय सीमा का पालन नहीं करेगा तो उसका आवेदन निरस्त कर दिया जाएगा। बता दें कि जिले में एमपी बोर्ड और सीबीएसई के 900 से ज्यादा निजी प्राइमरी, मिडिल, हाई और ह्ययर सेकंडरी स्कूल हैं। एमपी बोर्ड से संबंधित आठवीं तक के निजी स्कूलों की अधिक है। इनमें नर्सरी से पहली 25 प्रतिशत आरटीआई तहत आरक्षित है।

आरटीई के मान व मानकों की पूर्ति करना अनिवार्य
वर्ष विभाग ने नवीन मान्यता लेने की प्रक्रिया में बदलाव किया है। जो निजी स्कूल संचालकों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है। क्योंकि निजी स्कूल संचालकों को इस बार मान्यता प्राप्त करने के लिए आवेदन कंप्यूटर की जगह मोबाइल से भरना होगा। इसमें जानकारी ही जीओ टैग फोटो खींचकर ही संबंधित एप पर अपलोड किए जाएंगे। इस प्रक्रिया को लेकर विभाग ने निर्देश से निजी स्कूल संचालकों की सांसें फूली हुई हैं। क्योंकि पहली बार विभाग द्वारा मोबाइल के माध्यम से स्कूलों की मान्यता के लिए प्रक्रिया करवाई जा रही है। आवेदन के लिए निजी स्कूल के भवन, आवश्यक प्रशिक्षित शिक्षकों व स्कूल में आवश्यक संसाधनों की जीओ टैग फोटो अपलोड करने के साथ ही आरटीई के मान व मानकों की पूर्ति करना अनिवार्य है। स्कूल संचालकों को यह पूरी प्रक्रिया सजगता के साथ ही करना है।

राज्य शिक्षा केंद्र के ये निर्देश
अब एप की बात है तो स्कूलों द्वारा ग्रामीण क्षेत्र और कुछ शहरी क्षेत्रों में इंटरनेट का नेटवर्क नहीं मिलने की बात कही जा सकती है। ऐसे में राज्य शिक्षा केंद्र ने साफ कर दिया कि मोबाइल पर नेटवर्क नहीं मिल रहा तो स्कूल संचालक को उस स्थान पर जाना होगा, जहां नेटवर्क मिल रहा हो। पहले निजी स्कूलों को आरटीई के तहत मान्यता लेने के लिए ऑनलाइन आवेदन के साथ सारे दस्तावेज जमा करवाना होते थे। इसे सरल और साक्ष्य आधारित बनाने के लिए मोबाइल एप लाया गया है। एप के जरिए स्कूल संचालकों को भवन का फोटो, शिक्षकों की जानकारी और अन्य आवश्यक दस्तावेज अपलोड करना है। इसके अलावा आवेदन में जिओ टैग फोटो अपलोड करना जरूरी है, ताकि यह पता लग सके कि स्कूल ने दावे के अनुसार सही जानकारी है।

पहली बार मान्यता के लिए निजी स्कूलों को चुकाना होगी राशि

माध्यमिक स्कूल की मान्यता के लिए 7500 रुपए और प्राथमिक व माध्यमिक दोनों के लिए। 10 हजार आठवीं तक संचालित होने वाली निजी स्कूलों की मान्यता के लिए राशि का भी निर्धारण कर दिया है। ऐसा पहली बार हुआ है। पहले निजी स्कूल संचालकों द्वारा मान्यता के लिए कोई राशि खर्च नहीं की जाती थी। अब नए नियमों के तहत प्राथमिक स्कूल की मान्यता के लिए 5 हजार, रुपए मान्यता शुल्क जमा करना पड़ेगा। वहीं मान्यता का नवीनीकरण कराने वाली संस्था को 3 साल के लिए सुरक्षा निधि जमा कराना पड़ेगी। 250 विद्यार्थी वाले प्रावि स्कूल को 20 हजार, मावि को 25 हजार और दोनों के लिए 30 हजार रुपए र जमा कराना पड़ेंगे। 250 से अधिक विद्यार्थियों वाली प्रावि को 30 हजार, मावि को 35 हजार और दोनों के लिए 40 हजार की राशि जमा करनी होगी