जीरन। छुट्टियों की खुशियां उस समय मातम और आक्रोश में बदल गईं, जब जीरन के फिल्टर प्लांट के पास एक कुएं से लापता युवक आदित्यराज सिंह का शव बरामद हुआ। इस दुखद घटना ने जहाँ एक परिवार को उम्र भर का जख्म दिया, वहीं प्रशासन के अमानवीय और लापरवाह चेहरे को भी बेनकाब कर दिया। मूलतः मन्दसौर जिले के नाहरगढ़ थाना क्षेत्र के ग्राम गरनाई निवासी आदित्यराज सिंह (पिता दिलीप सिंह चन्द्रावत) पिछले एक सप्ताह से अपने नाना गोविंद सिंह (रिटायर्ड लाइनमैन) के घर जीरन आया हुआ था। 15 अप्रैल की रात 8 बजे वह दोस्तों के साथ टहलने की बात कहकर घर से निकला, लेकिन फिर वापस नहीं लौटा। परिजनों ने रात भर उसे हर जगह ढूंढा, लेकिन मोबाइल बंद होने के कारण उसका कोई सुराग नहीं मिल सका। गुरुवार दोपहर जब फिल्टर प्लांट के सामने स्थित कुएं में एक युवक की लाश देखी गई, तो सनसनी फैल गई। लेकिन असली त्रासदी तो इसके बाद शुरू हुई। सूचना देने के बावजूद जीरन थाने से कोई पुलिस बल समय पर मौके पर नहीं पहुँचा। संवेदनहीनता की हद तो तब हो गई जब शव को बाहर निकालने के लिए कोई सरकारी मदद नहीं मिली और अंततः शोकाकुल परिजनों को स्वयं कुएं में उतरकर अपने लाडले की लाश बाहर निकालनी पड़ी।
​घटना के लगभग एक घंटे बाद चीताखेड़ा पुलिस चौकी से चौकी प्रभारी मौके पर पहुंचे, लेकिन प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार उनका रवैया बेहद गैर-जिम्मेदाराना रहा। उन्होंने न तो मौके की पड़ताल की और न ही कुएं के पास जाकर साक्ष्य देखने की जहमत उठाई। इसके बजाय, वे एक घंटे से अधिक समय तक मौके पर बैठकर कागजी खानापूर्ति (कागज रंगने) में व्यस्त रहे।
​यही हाल नगर परिषद जीरन का रहा, जहाँ के कर्मचारी और पार्षद मौके पर तमाशबीन बनकर हाथ बांधे खड़े रहे। किसी ने भी आपदा की इस घड़ी में संवेदनशीलता नहीं दिखाई।
​पुलिस और नगर परिषद की इस घोर लापरवाही को लेकर राजपूत समाज के लोगों में भारी रोष व्याप्त है। समाज के लोगों का कहना है कि प्रशासन का यह रवैया निंदनीय है और पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाने के बजाय उन्हें प्रताड़ित करने जैसा है। शव का पंचनामा बनाकर उसे पोस्टमार्टम के लिए जिला चिकित्सालय नीमच भेजा गया है। पुलिस ने मर्ग कायम कर लिया है, लेकिन प्रशासनिक सुस्ती और लापरवाही ने पूरी व्यवस्था पर एक बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है।