नीमच। मालवा की वैष्णो देवी कही जाने वाली महामाया भादवा माता के दरबार में जब नए कप्तान ने शीश नवाया, तो सिर्फ मन्नत के धागे नहीं बंधे, बल्कि नीमच की जनता ने राहत की एक बड़ी सांस भी ली। जिले के नवागत पुलिस अधीक्षक (SP) राजेश व्यास ने औपचारिक पदभार संभालने से पहले आरोग्य तीर्थ भादवा माता मंदिर पहुंचकर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। जिले में सुख, समृद्धि और शांति की कामना के साथ उन्होंने अपने कार्यकाल का शंखनाद तो कर दिया है, लेकिन उनके सामने चुनौतियों का जो ‘अंगारों भरा रास्ता’ है, उस पर संभलकर चलना उनके लिए सबसे बड़ी परीक्षा होगी।

एक तरफ आस्था का यह पावन आगाज़ है, तो दूसरी तरफ अपराध की वो काली दुनिया जो नीमच की पहचान को लंबे समय से डस रही है।

चुनौती नंबर 1: –
अफीम और डोडा चूरा की तस्करी का ‘इंटरस्टेट सिंडिकेट’
नीमच जिला देश में अफीम की खेती का गढ़ है। स्वाभाविक है कि यहाँ अफीम और डोडा चूरा का काला कारोबार सदियों से जड़ें जमाए बैठा है।

तस्करों का नेटवर्क: -राजस्थान, गुजरात, पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों के बड़े-बड़े ड्रग तस्करों की निगाहें चौबीसों घंटे नीमच पर टिकी रहती हैं।

नवागत एसपी के लिए परीक्षा: -इस अंतरराज्यीय तस्करी नेटवर्क की रीढ़ की हड्डी को तोड़ना नए कप्तान राजेश व्यास के लिए सबसे पहली और सबसे बड़ी अग्निपरीक्षा साबित होने वाली है।

चुनौती नंबर 2: -‘घर के भेदी’ ही ढा रहे हैं लंका!
कहते हैं कि जब तक घर का भेदी साथ न दे, तब तक बाहर का चोर सेंध नहीं लगा सकता। नीमच पुलिस महकमे के गलियारों में यह चर्चा आम है कि विभाग में लगभग एक दर्जन ऐसे रसूखदार पुलिस अधिकारी हैं, जो NDPS एक्ट (मादक पदार्थ अधिनियम) के मामलों में तस्करों के साथ ‘साठगांठ’ के लिए कुख्यात रहे हैं।

सूत्रों की मानें तो…नए एसपी की आमद होते ही इन दागी पुलिसकर्मियों ने उनके इर्द-गिर्द मंडराना शुरू कर दिया है। इनका एकमात्र मकसद है- नए साहब को ‘सब्जबाग’ दिखाकर गुमराह करना और फिर से मलाईदार मैदानी पोस्टिंग हासिल करना।
इसके अलावा, कई ऐसे पुलिसकर्मी भी हैं जो सालों से ‘साहब बदल गए, सरकार बदल गई, पर हम नहीं बदलेंगे’ की तर्ज पर एक ही जगह जमे हुए हैं। इन ‘स्थाई’ चेहरों की कुंडली खंगालना नए कप्तान के लिए बेहद जरूरी है।

जनता को उम्मीद: अपराधियों में ‘खौफ’ और आमजन में ‘विश्वास’ भादवा माता के दर पर माथा टेककर एसपी राजेश व्यास ने एक संवेदनशील और कुशल नेतृत्व का संकेत तो दे दिया है। स्थानीय लोगों और ईमानदार पुलिसकर्मियों में इस बात को लेकर भारी उत्साह है। लेकिन सवाल वही है—

क्या नए कप्तान खाकी की आड़ में काली कमाई करने वाले इन ‘*विभीषणों’पर नकेल कस पाएंगे?

क्या वे सालों से एक ही जगह जमे पुलिसकर्मियों का पत्ता साफ कर महकमे में सर्जरी करेंगे?