( मनोज मीणा )
सिंगोली। नगर परिषद सिंगोली क्षेत्र में हुए दर्दनाक मकान हादसे ने प्रधानमंत्री आवास योजना के क्रियान्वयन और प्रशासनिक व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बीती रात तेज बारिश और आंधी के दौरान जर्जर मकान की छत गिरने से सिंगोली निवासी निलेश धनोतिया और उनकी माताजी सोसर बाई की मलबे में दबकर दर्दनाक मौत हो गई। स्थानीय लोगों के अनुसार निलेश धनोतिया समाचार पत्र वितरण का कार्य करते थे और आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से थे। सूत्रों की माने तो परिवार पिछले कई वर्षों से प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान स्वीकृत कराने के लिए नगर परिषद के चक्कर लगा रहा था,लेकिन उन्हें अब तक आवास का लाभ नहीं मिल सका। मजबूरी में परिवार जर्जर मकान में रहने को विवश था और आखिरकार वही मकान उनकी मौत का कारण बन गया। हादसे के बाद जिला प्रशासन ने तत्परता दिखाते हुए राहत सहायता की कार्रवाई शुरू की। नीमच कलेक्टर हिमांशु चंद्रा के निर्देश पर राजस्व पुस्तक परिपत्र (आरबीसी) भाग 6/4 के तहत पीड़ित परिवार को कुल 9 लाख रुपये की आर्थिक सहायता स्वीकृत की गई है। जावद एसडीएम प्रीति संघवी नाहर ने बताया कि मृतकों के वैध वारिस को यह सहायता प्रदान की जाएगी। प्रशासन द्वारा स्वीकृत सहायता में दोनों मृतकों की मृत्यु पर 4-4 लाख रुपये के हिसाब से कुल 8 लाख रुपये तथा क्षतिग्रस्त मकान के लिए 1 लाख रुपये शामिल हैं।
हालांकि प्रशासन की इस त्वरित कार्रवाई की सराहना की जा रही है, लेकिन नगर में यह सवाल भी उठ रहा है कि यदि पात्र परिवार को समय पर प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ मिल गया होता तो शायद यह हादसा टाला जा सकता था। स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर परिषद में लंबे समय से नियमित मुख्य नगर पालिका अधिकारी की नियुक्ति नहीं होने तथा व्यवस्था प्रभारी अधिकारियों के भरोसे संचालित होने से कई जनहित के कार्य प्रभावित हो रहे हैं। अब चर्चा इस बात की भी है कि क्या केवल आर्थिक सहायता देकर मामला समाप्त मान लिया जाएगा या फिर यह भी जांच होगी कि पात्र परिवार को वर्षों तक आवास योजना का लाभ क्यों नहीं मिला। लोगों की मांग है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों एवं कर्मचारियों की जवाबदेही भी तय की जाए, ताकि भविष्य में किसी अन्य परिवार को ऐसी त्रासदी का सामना न करना


