नीमच। सिंगोली में जर्जर मकान की छत गिरने से मां-बेटे की दर्दनाक मौत के बाद प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक बहस तेज हो गई है। एक ओर नगर परिषद सिंगोली ने दावा किया है कि मृतक परिवार द्वारा कभी प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए आवेदन ही नहीं किया गया,वहीं कांग्रेस नेताओं ने इस दावे पर सवाल उठाते हुए इसे गरीबों तक योजनाओं का लाभ नहीं पहुंचने का गंभीर मामला बताया है। नगर परिषद द्वारा जिला शहरी विकास अभिकरण को भेजे गए प्रतिवेदन में कहा गया है कि मृतक सोसरबाई तथा उनके पुत्रों की ओर से प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत कोई आवेदन रिकॉर्ड में उपलब्ध नहीं है। परिषद का कहना है कि योजना के दोनों चरणों में संबंधित परिवार का नाम दर्ज नहीं मिला, इसलिए लाभ स्वीकृत नहीं हो सका। इधर हादसे के बाद जिला प्रशासन सक्रिय हो गया है। कलेक्टर हिमांशु चंद्रा ने मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख रुपये की सहायता राशि तथा क्षतिग्रस्त मकान के लिए 1 लाख रुपये की अतिरिक्त सहायता देने की घोषणा की है। कुल 9 लाख रुपये की आर्थिक सहायता का प्रकरण तैयार किया जा रहा है। साथ ही यह जांच भी कराई जाएगी कि जरूरतमंद परिवार प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभ से वंचित क्यों रह गया।
मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। नीमच दौरे पर आए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जब हर गरीब को आवास देने के दावे किए जा रहे हैं, तब सिंगोली जैसी घटनाएं व्यवस्था की सच्चाई उजागर करती हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर एक गरीब परिवार जर्जर मकान में रहने को मजबूर क्यों रहा। वहीं कांग्रेस नेता पंकज तिवारी ने दावा किया कि मृतक निलेश वर्षों से प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए प्रयास कर रहा था और कई बार अधिकारियों के चक्कर लगा चुका था। तिवारी के अनुसार उन्होंने स्वयं भी संबंधित अधिकारियों से परिवार को योजना का लाभ दिलाने की मांग की थी,लेकिन स्वीकृति नहीं मिली।
अब पूरे मामले में तीन अलग-अलग दावे सामने हैं—नगर परिषद आवेदन नहीं मिलने की बात कह रही है, कांग्रेस परिवार के प्रयासों का दावा कर रही है और जिला प्रशासन ने जांच के आदेश दे दिए हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि परिवार वास्तव में अत्यंत जरूरतमंद था,तो उसे समय रहते सुरक्षित आवास क्यों नहीं मिल पाया? इस प्रश्न का जवाब अब प्रशासनिक जांच के निष्कर्षों के बाद ही सामने आएगा।


