सिंगोली:- तेज आंधी और बारिश ने सोमवार रात सिंगोली के एक जर्जर मकान को गिरा दिया। मलबे में दबकर अखबार बेचने वाले निलेश धनोतिया, उम्र 35 साल और उनकी माताजी सोसर बाई, उम्र 60 साल की मौके पर ही मौत हो गई। इस हादसे के बाद प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

*हादसा और प्रशासन की मदद*
घटना नगर परिषद क्षेत्र में हुई। खबर मिलते ही प्रशासन हरकत में आया। नीमच के कलेक्टर हिमांशु चंद्रा के आदेश पर राजस्व पुस्तक परिपत्र भाग छह/चार के तहत पीड़ित परिवार को नौ लाख रुपये की आर्थिक मदद दी गई है। इसमें दोनों मृतकों के लिए चार-चार लाख रुपये और टूटे मकान के लिए एक लाख रुपये शामिल हैं। जावद के अनुमंडल अधिकारी प्रीति संघवी नाहर ने कहा कि यह राशि मृतकों के कानूनी वारिस को दी जाएगी।

*मोहल्ले के लोगों का कहना है*
स्थानीय लोगों और रिश्तेदारों का कहना है कि निलेश का परिवार बहुत गरीब था। निलेश अखबार बांटकर घर चलाते थे। उनका मकान कई सालों से टूटा-फूटा था। मोहल्ले वालों का आरोप है कि परिवार ने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्का मकान पाने के लिए कई बार नगर परिषद के चक्कर लगाए, लेकिन उन्हें मकान नहीं मिला। मजबूरी में वे उसी टूटे मकान में रहने को मजबूर थे।

*नगर परिषद का कहना है*
नगर परिषद सिंगोली के अधिकारियों का कहना है कि निलेश धनोतिया ने प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए कभी कोई लिखित आवेदन नहीं दिया था। परिषद के कागजों में उनके नाम का कोई आवेदन दर्ज नहीं है। बिना आवेदन के मकान मंजूर नहीं किया जा सकता।

*अब बड़े सवाल ये हैं*
1. *जानकारी की कमी?* अगर आवेदन नहीं हुआ तो क्या इलाके के सर्वे के समय गरीब परिवार को योजना की जानकारी नहीं दी गई? पार्षद या कर्मचारियों ने मदद की थी या नहीं?
2. *कागजों की जांच जरूरी*: प्रधानमंत्री आवास योजना की सूची, इंतजार की सूची और कंप्यूटर में दर्ज नामों की जांच होनी चाहिए। कहीं तकनीकी गलती से नाम छूट तो नहीं गया?
3. *अधिकारी की कुर्सी खाली*: नगर परिषद में कई महीनों से स्थायी मुख्य नगर पालिका अधिकारी नहीं है। काम प्रभारी अधिकारी देख रहे हैं। क्या इसी वजह से गरीब लोगों का नाम छूट गया?

*जरूरत जांच की है, दोष लगाने की नहीं*
नौ लाख रुपये से दो जान वापस नहीं आएंगी। प्रशासन ने जल्दी मदद दी, यह अच्छी बात है। लेकिन इस हादसे से सीख लेना जरूरी है। जिला प्रशासन से मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करे। सर्वे की सूची, आवेदन के कागज और इलाके की रिपोर्ट देखी जाए। ताकि पता चले कि गलती कहां हुई – परिवार ने आवेदन नहीं किया, या सिस्टम ने गरीब को पहचाना नहीं।

प्रधानमंत्री आवास योजना का नारा है “सबके लिए आवास”। निलेश को आवास मिला या नहीं… यह सवाल अब सिंगोली ही नहीं, पूरे सिस्टम से पूछा जा रहा है। ताकि आगे कोई और गरीब “आवेदन के इंतजार” में टूटी छत के नीचे न सोए।