नीमच/ जिले के मनासा थाना पुलिस ने गुरुवार को आईपीएल सट्टा कारोबार के खिलाफ बड़ी और प्रभावी कार्रवाई करते हुए मुख्य सरगना कमल सिंधवानी को गिरफ्तार कर लिया है। आईपीएल शुरू होते ही नीमच जिले में सक्रिय सट्टा माफियाओं के खिलाफ पुलिस ने आखिरकार अपनी चुप्पी तोड़ते हुए बड़ी कार्रवाई की है। मनासा थाना पुलिस ने लंबे समय से चल रही सुस्ती को खत्म करते हुए बुधवार रात दबिश देकर सट्टा नेटवर्क से जुड़े मुख्य आरोपी कमल सिंधवानी को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। थाना प्रभारी निलेश अवस्थी के नेतृत्व में की गई इस कार्रवाई में पुलिस ने सट्टा आईडी संचालित करते हुए आरोपी को पकड़ा है। वहीं, ‘आईडी दाता’ बताए जा रहे राकेश कुशवाह उर्फ ठाकुर अभी भी फरार हैं, जिनकी तलाश में पुलिस की साइबर टीम जुटी हुई है।
करोड़ों का सट्टा और ‘भांजे’ का नेटवर्क सूत्रों के अनुसार, यह पूरा सट्टा कारोबार बड़े स्तर पर संचालित हो रहा था। गिरफ्तार आरोपी कमल सिंधवानी और फरार राकेश ठाकुर कुख्यात ‘बंटी-बबली’ गैंग से जुड़े बताए जा रहे हैं। चर्चा है कि यह नेटवर्क जिले के बड़े सट्टेबाज ‘भांजे’ के इशारों पर काम करता है। बताया जा रहा है कि इस सिंडिकेट के जरिए हर महीने करोड़ों रुपये का लेन-देन होता था और बिना ‘भांजे’ की अनुमति के कोई भी नई डिजिटल आईडी जारी नहीं होती थी। इससे जिले में सट्टे के गहरे नेटवर्क का अंदाजा लगाया जा सकता है।
क्या यह कार्रवाई ‘ऊंट के मुंह में जीरा’?
क्षेत्र में पहले से ही बड़े सटोरियों पर कार्रवाई की मांग उठ रही थी। हालांकि पुलिस ने शुरुआत कर दी है, लेकिन जानकारों का कहना है कि जब तक इस सिंडिकेट के बड़े चेहरे और मास्टरमाइंड तक पुलिस नहीं पहुंचेगी, तब तक यह कार्रवाई अधूरी मानी जाएगी।
नीमच जिले में सट्टेबाजों ने गांव-गांव तक अपनी पैठ बना ली है और कई स्थानों पर यह नेटवर्क खुलेआम संचालित हो रहा है।
फरार सटोरियों पर दबाव, ‘राहुल’ अब तक पुलिस की पकड़ से बाहर
पड़ोसी जिलों और राजस्थान पुलिस की सक्रियता के बीच नीमच पुलिस पर भी कार्रवाई का दबाव बढ़ा है। जिले का एक और बड़ा सटोरिया राहुल पहले से ही फरार बताया जा रहा है, जिस पर केस दर्ज होने के बावजूद वह गिरफ्त से बाहर है। इसको लेकर आम चर्चा है कि कहीं न कहीं उसे संरक्षण मिल रहा है। सट्टे की काली कमाई से जुड़े लोग बाहर ऐशो-आराम की जिंदगी जी रहे हैं, जबकि इसका बुरा असर स्थानीय युवाओं पर पड़ रहा है।
आगे क्या? फिलहाल पुलिस फरार आरोपियों की तलाश में जुटी है और करोड़ों के लेन-देन की जांच भी की जा रही है। अब देखना यह होगा कि पुलिस केवल छोटे आरोपियों तक ही सीमित रहती है या इस बार पूरे सट्टा सिंडिकेट की कमर तोड़ने में सफल होती है।


