नीमच। (मनोज मीणा)  देशभर में चल रहे आईपीएल सीजन के बीच क्रिकेट सट्टेबाजी के खिलाफ ताबड़तोड़ कार्रवाई का दौर देखने को मिल रहा है। पुलिस और जांच एजेंसियां लगातार दबिश देकर सट्टा ठिकानों को ध्वस्त करने का दावा कर रही हैं। लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या यह सक्रियता सिर्फ आईपीएल तक ही सीमित है?
जानकारों की मानें तो क्रिकेट सट्टा कारोबार सिर्फ आईपीएल तक सीमित नहीं है, बल्कि सालभर देश-विदेश में होने वाले छोटे-बड़े मैचों में भी यह धंधा पूरी तरह सक्रिय रहता है। हर गेंद पर लगने वाले दांव इस नेटवर्क की गहराई और विस्तार को दर्शाते हैं, लेकिन इन पर कार्रवाई का अभाव कई सवाल खड़े करता है। नीमच जिले की बात करें तो यहां क्रिकेट सट्टे का नेटवर्क वर्षों से मजबूत होता जा रहा है। सूत्र बताते हैं कि जो लोग कभी छोटे स्तर पर सट्टा लगाते थे, वे आज बड़े माफिया के रूप में स्थापित हो चुके हैं। इनका प्रभाव इतना बढ़ चुका है कि यह कारोबार अब संगठित सिंडिकेट का रूप ले चुका है। चौंकाने वाली बात यह है कि कार्रवाई के नाम पर अक्सर छोटे सटोरियों को पकड़ा जाता है, जबकि असली सरगना कानून की पकड़ से दूर रहते हैं। इससे यह भी सवाल उठता है कि क्या कार्रवाई केवल आंकड़े बढ़ाने तक सीमित है? स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि सट्टा कारोबार से जुड़े कुछ बड़े नाम ऐसे हैं, जिनके इशारों पर पूरा नेटवर्क संचालित होता है। ये लोग सामने नहीं आते, बल्कि अपने गुर्गों के माध्यम से पूरे सिंडिकेट को नियंत्रित करते हैं। सामाजिक स्तर पर भी इन सट्टा कारोबारियों का प्रभाव बढ़ता जा रहा है। अवैध कमाई के दम पर इन्होंने अपनी पकड़ मजबूत कर ली है, जिससे युवा पीढ़ी भी इस दलदल में फंसती जा रही है। अब बड़ा सवाल यह है कि क्या कभी इन बड़े सट्टा माफियाओं पर भी सख्त कार्रवाई होगी, या फिर हर बार की तरह छोटे खिलाड़ियों पर ही शिकंजा कसकर जिम्मेदारी पूरी कर ली जाएगी?

सूत्रों के मुताबिक,शहर में टोनी,नंदन चौहान, बिट्टू,जाहिद,सुमित,युनूस,ब्रजेश,कमलेश,विनोद अग्रवाल,बंटी स्टेशन, मोंटू,रितिक सलूजा,सौरभ मित्तल,,मनीष सहित कई नाम इस काले कारोबार में सक्रिय बताए जा रहे हैं।