नीमच। शहर से इस वक्त की सबसे बड़ी और सनसनीखेज खबर सामने आ रही है। जिस चमचमाती फोरलेन सड़क का सपना दिखाकर जनता को गुमराह किया जा रहा था, उसकी ‘घटिया’ हकीकत अब खुलकर सामने आने वाली है। महू-नीमच हाईवे को शहर से जोड़ने वाले इस प्रमुख मार्ग के निर्माण में भ्रष्टाचार की बू आते ही राजधानी भोपाल में बैठे आला अधिकारियों के कान खड़े हो गए।
बुधवार को भोपाल से लोक निर्माण विभाग (PWD) की एक हाई-लेवल स्पेशल टीम ने बिना किसी पूर्व सूचना के नीमच में अचानक धावा बोल दिया। टीम सीधे नाकोड़ा ट्रांसपोर्ट के सामने पहुंची और भारी-भरकम ड्रिल मशीनों से नवनिर्मित सीसी रोड को छलनी करना शुरू कर दिया। सड़क के बीचों-बीच जैसे ही ड्रिल मशीन चली और कोर कटिंग (सड़क का सैंपल) बाहर आया, वहां मौजूद ठेकेदार और उसके गुर्गों के चेहरे की हवाइयां उड़ गईं।
15 किलोमीटर का सफर और भ्रष्टाचार का ‘खेल’
बता दें कि नीमच शहर को हाईवे से जोड़ने के लिए करीब 15 किलोमीटर लंबी इस फोरलेन सीसी रोड का निर्माण करोड़ों की लागत से किया जा रहा है। शुरुआत से ही स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इसकी गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल उठाए थे। आरोप था कि:
घटिया मटेरियल:—
सड़क निर्माण में बेहद घटिया दर्जे की सीमेंट और गिट्टी का इस्तेमाल हो रहा है।
कम मोटाई:—
कागजों पर सड़क की जो गहराई (मोटाई) दिखाई गई है, जमीन पर उससे बहुत कम काम किया गया है।
जल्दबाजी में लीपापोती:—
तकनीकी मापदंडों को ताक पर रखकर ठेकेदार बस काम खत्म करने में जुटा था।
तो फिर गिरेगी गाज—
भोपाल की टीम ने नाकोड़ा ट्रांसपोर्ट के सामने सड़क की गहराई और उसमें इस्तेमाल सामग्री की जांच के लिए सैंपल लिए हैं। टीम के सख्त तेवर देखकर साफ है कि अगर गड़बड़ी पाई गई, तो सिर्फ ठेकेदार ही नहीं, बल्कि इसमें शामिल स्थानीय इंजीनियरों पर भी गाज गिरना तय है।”
शिकायतों का अंबार, हरकत में आई सरकार:—
इस मामले को लेकर लगातार मिल रही शिकायतों के बाद भोपाल मुख्यालय ने इस मामले को गंभीरता से लिया। बुधवार को शुरू हुई यह औचक जांच अभी भी लगातार जारी है। टीम के अधिकारी चिलचिलाती धूप में खुद खड़े होकर एक-एक इंच की नापजोख करवा रहे हैं।
ठेकेदार के खेमे में हड़कंप:
जैसे ही भोपाल की टीम के आने की खबर शहर में फैली, अब तक मनमानी कर रहे ठेकेदार के अमले में हड़कंप मच गया। जो काम महीनों से कछुआ गति से या लापरवाही से चल रहा था, उसे आनन-फानन में सुधारने की कोशिशें शुरू हो गईं। लेकिन PWD की टेक्निकल टीम के पास आधुनिक उपकरण हैं, जिससे सड़क के भीतर का सच चंद मिनटों में बाहर आ जाएगा। अब देखना यह है कि इस जांच रिपोर्ट के बाद सरकार इस महाघोटाले पर क्या कड़ा एक्शन लेती है, या फिर हर बार की तरह इस बार भी फाइलें दबा दी जाएंगी।


