नीमच। शहर में शासकीय जमीनों ओर नालों पर बढ़ते अतिक्रमण के बीच विकास नगर स्थित ग्वाल टोली पुलिया के समीप नाले पर किए गए  अवैध निर्माण का मामला आखिर प्रशासनिक सख्ती के बाद हट गया। नाले की भूमि पर खड़ी की गई पक्की दीवार और बीम कालम को 16 मई शनिवार सुबह जेसीबी की मदद से तोड़ दिया गया। खांस बात यह रही कि नगर पालिका का अमला मौके पर पहुंचता उससे पहले ही निर्माणकर्ता ने कार्रवाई के भय से खुद ही अतिक्रमण हटाना शुरू कर दिया पूरे घटनाक्रम को लेकर क्षेत्र में चर्चा का दौर चलता रहा। जानकारी के अनुसार विकास नगर 14/2 विस्तार में भले से लगे त्रिकोण भूखंड क्रमांक 593 को चौरस आकार देने के लिए नाले की भूमि पर अतिक्रमण कर पक्की दीवार और बीम कालम खड़े किए गए थे। इस मामले को लेकर लगातार सवाल उठ रहे थे। ओर स्थानीय लोगों में नाराजगी भी बनी हुई थी। नगर पालिका सीएमओ दुर्गा बामनिया द्वारा 3 तीन में अतिक्रमण हटाने की चेतावनी दिए जाने के बावजूद निर्माण कार्य रुकने के बजाय ओर तेजी से किया जा रहा था।

खबर के बाद हरकत में आया प्रशासन

सूत्रों के अनुसार मामला कलेक्टर हिमांशु चंद्रा तक पहुंचने के बाद उन्होंने पूरे प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए नगर पालिका अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए प्रशासनिक सख्ती की भनक लगते ही निर्माणकर्ता सक्रिय हो गया और शनिवार सुबह करीब 11 बजे निजी जेसीबी बुलाकर नाले में खड़ी की गई  दीवार और बीम कालम को तोड़ना शुरू किया. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार नगर पालिका का अमला मौके पर पहुंचता उससे पहले ही निर्माणकर्ता ने कार्रवाई के भय से अधिकांश अतिक्रमण हटा लिया गया था। कुछ ही देर में निर्माण जमीदोज कर दिया गया । इस दौरान मौके पर भीड़ भी जमा हो गई और पूरे घटनाक्रम को लेकर चर्चाएं होती रही ।

नोटिस ओर चेतावनी तक सीमित रहती हैं कार्रवाई

शहर में अवैध निर्माण और नाले की भूमि पर किए जा रहे कब्जों को लेकर नगर पालिका की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि नगर पालिका पहले केवल नोटिस और चेतावनी देकर औपचारिकता निभाती है, जिससे अवैध निर्माणकर्ताओं को पर्याप्त समय मिल जाता है। बाद में जब मामला मीडिया और प्रशासनिक स्तर पर तूल पकड़ता है, तब जाकर कार्रवाई होती दिखाई देती है। लोगों का कहना है कि यदि शुरुआत में ही सख्ती बरती जाए तो नाले की भूमि पर निर्माण कार्य इतना आगे तक नहीं बढ़े। नागरिकों ने यह भी सवाल उठाया कि तीन दिन की चेतावनी अवधि के दौरान निर्माण कार्य लगातार कैसे चलता रहा और जिम्मेदार अधिकारी समय रहते मौके पर कार्रवाई करने क्यों नहीं पहुंचे। स्थानीय रहवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि अवैध निर्माणों पर त्वरित और निष्पक्ष कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में सरकारी भूमि और नालों पर अतिक्रमण रोका जा सके।